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' परिवर्तन ' तीसरा वॉल्यूम समरेश जोर से शोर के साथ वापस आता है - डेढ़ से दो सौ मीटर के बीच बम फटने की आवाज। दो-चार मोटरसाइकिलों ने घोर शोर मचाया और भागने लगे! कौन जानता है कि कोई व्यक्ति गंभीर रूप से घायल या मारा गया है - स्थानीय या विदेशी? ऐसा नहीं था, लेकिन यह 'परिवर्तन' क्यों? करीब दो दशक पहले गांव के लोगों ने अनजाने में बो दिए बीज- मैं इसका गवाह हूं, यानि समरेश...! आज से करीब दो दशक पहले... साल्टा 2000-2001 भगवानपुर मौजा के आसपास विशाल 'औद्योगिक पार्क' धीरे-धीरे विकसित हुआ है। इस कहानी का मुख्य आधार-भगवानपुर की जीवनी...जिसके सामाजिक-राजनीतिक परिवार-भौगोलिक-प्राकृतिक-सबसे ऊपर मानवीय संबंधों को इस उपन्यास में धीरे-धीरे 'रूपांतरित' किया गया है, वह है इसकी वास्तविक तस्वीर!