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प्रस्तुत पुस्तक में लेखक ने राजस्थान में हिंदी पत्रकारिता का उद्भव और विकास के सोपानक्रम को विश्लेषित कर प्रमुख हिंदी पत्र-पत्रिकाएं एवं यशश्वी पत्रकारों आदि पर विश्लेषण करने के साथ - साथ पत्रकारिता के विविध आयाम, समाज के लिए पत्रकारिता की उपयोगिता एवं अंग्रेजी दासता से मुक्ति प्राप्त कर अभी तक की सामाजिक समस्याओं के लिए पत्र-पत्रिकाओं के संघर्ष को अभिव्यक्ति देकर साकार किया है। वर्तमान समय में एक ऐसी पुस्तक की आवश्यकता थी, जिसमें हमें राजस्थान के पत्रकार व पत्र-पत्रिकाओं का उचित समावेश हो, यह पुस्तक इस उद्देश्य को पूर्ण करती है।पुस्तक का प्रमुख उद्देश्य हिंदी पत्रकारिता के द्वारा जनचेतना लाकर समाज में एक नये बदलाव को दिखलाना है कि उत्कृष्ट पत्रकारिता में वह शक्ति है जो समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला सकती है । समाज को अज्ञानता की बेड़ियों से निकालने की ताकत पत्रकारिता से ही संभव है इसकी पुष्टि भी इस पुस्तक के माध्यम से होती है । प्रारम्भिक काल में जहाँ पत्रकारिता का उद्देश्य अंग्रेजों की दासता से मुक्ति प्राप्त करना था वहीं वर्तमान में समाज में व्याप्त कुरीतियों, कुप्रथाओं एवं अन्धविश्वास आदि का संघर्ष कर समाज से समूल विनाश करना है । किसी भी शोषण को मौन रहकर सहने के बजाय उसके खिलाफ बिना हथियारों के लड़ना सिखाना पत्रकारिता के द्वारा ही संभव है, यहीं इस पुस्तक का मूल उद्देश्य है । इस पुस्तक में न केवल हिंदी पत्रकारिता का इतिहास वरन प्रमुख पत्र-पत्रिकाओं एवं पत्रकारों का स्वतंत्रता संघर्ष में योगदान आदि का विस्तृत विश्लेषण किया गया है । यह पुस्तक हिंदी पत्रकारिता के शोधार्थियों एवं पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए उपयोगी रहेगी ।