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प्रियंशा प्रिया एक संवेदनशील कवयित्री और भावी शिक्षिका हैं, जिनकी कविताएँ उनके अनुभवों, भावनाओं और विश्वास की सच्ची झलक हैं। 'आमोदिनी' उनकी पहली काव्य संकलन है, जिसमें उन्होंने माँ-पापा के स्नेह, शिव भक्ति और जीवन की अनकही-अनसुनी कहानियों को सरल शब्दों में पिरोया है। उन्हें विश्वास है कि भावनाएँ बाँटने के लिए बड़े शब्द नहीं, बस एक सच्चा दिल चाहिए। यह पुस्तक पाठकों के दिलों को छू सके, यही उनकी सबसे बड़ी कामना है।