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हिमाचली सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षक-डॉ.गौतम शर्मा ’व्यथित’ शीर्षक से यह पुस्तक एक व्यक्ति विशेष के योगदान पर केन्द्रित है। इस लेखन के विवेच्य व्यक्ति ’व्यथित’ एक बहुआयामी व्यक्तित्व हैं। वे एक हिन्दी साहित्यकार, शिक्षाविद्, भाषा विद्वान्, कवि नाटककार, व्यंगकार, लोक संगीत प्रेमी, पहाड़ी भाषाकार, लेखक, विश्लेषक, आलोचक, सम्पादक, संकलनकर्ता, संरक्षण, संवर्धक, दस्तावेजीकरण कर्ता तथा सक्रिय संस्कृति कर्मी के रूप में जाने जाते हैं तथा लगभग पांच दशक से हिमाचल प्रदेश की कला, साहित्य, लोक कलाओं, लोक संगीत, लोक नाट्य, लोक संस्कृति तथा लोक कलाकारों के विकास, पुनरुत्थान, संग्रहण, संकलन एवं संवर्धन के लिए समर्पित रूप से कार्य कर रहे हैं। वे एक प्रख्यात संस्कृति कर्मी, चिन्तक तथा विचारक हैं। कला एवं संस्कृति से सम्बन्धित विभिन्न क्षेत्रों में अपना अधिकार रखते हैं। मूलतः एक शिक्षक होने के साथ वे एक प्रसिद्ध लेखक, साहित्यकार, लोक कला शिल्पी, लोक नाट्यकार, संस्कृति कर्मी के रूप मे कलाओं का संरक्षण एवं संवर्धन कर रहे हैं। संगीत, ज्ञान-विज्ञान का क्षेत्र इतना व्यापक होता है कि हम किसी भी कार्य के पुस्तक, मूल्यांकन तथा विश्लेषण में पूर्ण विराम नहीं लगा सकते। एक बार पुस्तक होने के पश्चात भी हम उसकी परतें पुनः खोल सकते हैं। किसी भी पुस्तक की अपनी सीमायें रहती हैं तथा कला, साहित्य, संस्कृति एवं लेखन के विभिन्न क्षेत्रों मे डॉ. ’व्यथित’ का कार्य असीमित है। वे एक विशाल व्यक्तित्व हैं। कांगड़ा जनपद की मिट्टी से बचपन से जुड़े हैं। वर्तमान समाज में भौतिक वाद तथा संचार माध्यमों के कारण लोगों के आचरण, वृतियों तथा रुचियों में बहुत से परिवर्तन हो रहे हैं।