Librería Samer Atenea
Kálamo Books
Librería Elías (Asturias)
Librería Kolima (Madrid)
Librería Proteo (Málaga)
'उलझनें भारत की' एक विचारोत्तेजक पुस्तक है, जो भारत के सामाजिक, नैतिक, और शैक्षिक संकटों की गहराई से पड़ताल करती है। लेखक ने जीवन के अनुभवों और समाज की वास्तविकताओं को आधार बनाकर यह दर्शाया है कि आज़ादी के 75 वर्षों बाद भी भारत क्यों कई बुनियादी समस्याओं से जूझ रहा है। भ्रष्टाचार, नैतिक पतन, शिक्षा की गिरती गुणवत्ता और युवाओं का दिशाहीन भटकाव जैसे मुद्दों को सरल भाषा और प्रभावशाली शैली में प्रस्तुत किया गया है। पुस्तक का मूल संदेश यह है कि यदि शिक्षा व्यवस्था में सही बदलाव लाए जाएँ-जहाँ नैतिकता, जिज्ञासा और व्यावहारिक सोच का विकास हो-तो आने वाले 15 वर्षों में भारत को एक नई दिशा दी जा सकती है। यह सिर्फ आलोचना नहीं करती, बल्कि समाधान भी सुझाती है, जिससे हर पाठक जुड़ाव महसूस करता है और बदलाव की प्रेरणा पाता है।