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किसी ने मुझसे पूछा...कैसे लिख लेते हो.....इतना सब कुछ......मैंने कहा......जिसके अंदर होगा विचारों का सैलाब......जिसके अंदर होगे भावनाओं के उठते तूफान......जिसके अंदर होगा कुछ नया करने का जज्बा......जिसके अंदर हो सही को सही...और गलत को गलत कहने की ताकत.....वो कुछ भी कर सकता है.....वो इतिहास बदल सकता है.......और एक नया इतिहास भी रच सकता है......