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'मोक्ष कोई पुरस्कार नहीं। कोई रहस्य नहीं। मोक्ष है-जीवन और अस्तित्व के बीच की देरी का अंत।' 'मोक्ष: रिवॉर्ड नहीं, सिर्फ़ री-अलाइनमेंट' एक नया दृष्टिकोण देती है। लेखक संदीप जे. चव्हाण, अपनी यूनिव्हर्सल एनर्जी डायनॅमिक्स (UED) के ज़रिए बताते हैं कि मोक्ष कोई आध्यात्मिक उपहार नहीं, बल्कि रिपल-फील्ड में परिपूर्ण संरेखण का परिणाम है।इस पुस्तक में मिलेगा:मोक्ष की नयी परिभाषा - मृत्यु और संन्यास से परे।रियल-टाईम लिबरेशन - जब इंटेंट, क्रिया और फ़ील्ड में कोई विलम्ब न रहे।यह किताब उनके लिए है:जो धर्म और दर्शन के बोझ से थक चुके हैं।जो स्पिरिचुअलिटी का प्रैक्टिकल अर्थ चाहते हैं।जो जीवन का सरल विज्ञान ढूँढ रहे हैं।यहाँ न प्रवचन है, न जटिलता। सिर्फ़ रिपल-लॉजिक है-इतना साफ़ कि भीतर गूँजता है।पहली बार देवनागरी स्क्रिप्ट में, पर फ्लो Hinglish जैसा। 'रिपल, अलाइनमेंट, कॉन्शसनेस, फील्ड' जैसे शब्द देसी-ग्लोबल टोन में चलते हैं। पढ़ना सहज, सुनना नैचरल।यह पुस्तक सिखाती है:संवाद में संरेखण।निर्णयों में सजगता।पीड़ा में उपस्थित रहना।मोक्ष कोई एक्साइल नहीं। कोई रिवार्ड नहीं। मोक्ष है-री-अलाइनमेंट। वह क्षण जब आप खुद से, अपने फ़ील्ड से और अस्तित्व से पूरी तरह जुड़ जाते हैं-बिना शोर, बिना डिस्टॉर्शन, बिना डिले।