Librería Samer Atenea
Librería Aciertas (Toledo)
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Librería Perelló (Valencia)
Librería Elías (Asturias)
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Librería Kolima (Madrid)
Librería Proteo (Málaga)
छोटी उम्र और पूरा काम उस पर तीन बच्चे पांच साल में पैदा हो गये । पति भी रसिक मिजाज आये दिन व्यापार के सिलसिले में शहर से बाहर रहना पर मजाल जो अपने पति की थोड़ी सी बुराई सुन लें । पति के व्यसन ऐसे थे कि आर्थिक हालत नाजुक होने लगी । आये दिन मायके आजाती रो रो कर मां और दादी की हमदर्दी पा लेती और आर्थिक मदद ले जाती।भाग्य की विडम्बना पति का लम्बी बीमारी के बाद देहान्त हो गया।हिम्मत करके बच्चों को पढाया बच्चे अच्छे कमाने लगे ।शादी करके बहू घर आगयी पर बहुयें थी नये जमाने की सास उन्हें कैसे भी सहन नहीं हुई आये दिन घर में कलह । दीदी कुछ समझ नहीं पारही थी जिस घर को बनाने में कितना कष्टमय जीवन व्यतीत करा , आज बहुयें कह रही हैं कि पति हमारे हैं और हमारा घर है । रात को पानी पीने उठी तो तीनो बेटे और बहुयें एक कमरे में थे बातो की आवाज सुन कर रूकी बहुये कह रही थी कि बुढ़िया को किसी वृद्धा आश्रम में छोड़ आओ।दीदी बहुत दुखी हो गयी और रात को ही घर छोड़ दिया । बेटों ने कोशिश की ढूंढने की पर उन्हें उनकी माँ नहीं मिली । बहुयें तो चाहती ही यही थी ।अब बिलकुल स्वतन्त्र होगयी । तीनों बेटो से सब रिश्ते दारों ने पूछा हो इन लोगों ने कह दिया कि वह बीमार थी और बोम्बे जाकर इलाज कराया ।