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मैं वंदन राज टाक , यह कविताओं की किताब लिखने का मेरा मक़सद यह है की , मैं अपने जज़्बातों को और अपनी सोच को शब्दों का रूप देकर लोगों के अंदर भरपूर आत्म विश्वास देकर अभिप्रेरण से जीवन जीने को प्रोत्साहित कर सकूँ , इन कविताओं में मैंने मंज़िल को स्वाभिमान के साथ पाने के लिए जिन जिन भी ख़ूबियों की ज़रूरत होती है , उन सभी बातों को लिखा है ... जैसे :- 'मंज़िल को पाने के लिए इम्तिहान देना' 'जुनून रखना' 'ख़ुद की क़ीमत को पहचान ना' ' सब्र रखना' ' हिम्मत रखना' ' समय की कद्र करना' ' योद्धा होने की पहचान बन ना' ' रातों को जाग कर मंज़िल के लिए संघर्ष करना' ' समय को हक़ में करने का हुनर रखना' ' मोहब्बत से ज़्यादा मंज़िल के लिए जुनून रखना' ' मददगार होना' ' हर ज़ुबान पे चर्चे होना' ' नकारात्मक लोगों को अनसुना करना' ' अपने भीतर की ख़ूबियों को जान ना' ' क़ाबिल बन ना' ' सकारात्मक रहना' ' हौसला रखना' ' शौक़ को भुला कर कर्म करना' ' अपने आप को वक़्त देना' ' अनंत से भी आगे का सोचना' ' कुछ भी नामुमकिन ना समझना' ' मुश्किलें सहन करना' ' ख़्वाबों के पीछे जाना' ' दृढ़ निश्चय रखना' ' ख़ुद पे यक़ीन रखना' ' नैतिकता और नीति के साथ आगे बढ़ना' ' स्वाभिमान रखना' ' वक़्त के उतार चढ़ाव को समझना' ' बाक़ियों से अलग बन ना' ' ख़ुद का बैहतर किरदार बनाना' इन सभी ख़ूबियों को मैंने कविताओं की शक्ल दी है , मेरी लिखी हुई इन कविताओं को पढ़ हर व्यक्ति ज़िंदगी में आगे बढ़े , अपनी मंज़िल को नैतिकता और नीति के साथ पाते हुए समाज और दुनिया के लिए मददगार बने , यही मेरी ख़्वाहिश है।