Librería Samer Atenea
Kálamo Books
Librería Elías (Asturias)
Librería Kolima (Madrid)
Librería Proteo (Málaga)
किसी भी अच्छे काव्य संग्रह की तरह भाई अंशु गुप्ता के इस काव्य संग्रह में भी अधिकांश कविताओं का विषय प्रेम है। इस युवा रचनाकर ने आज से कई साल पहले लेखन के शुरूआती दौर में प्रेम के विभिन्न पहलुओं पर अपनी क़लम चलाई। इन रचनाओं को पढ़कर सहज रूप से लगता है कि वो प्रेम की इन तमाम अवस्थाओं से गुज़रे होंगे मगर आश्चर्य की बात ये है कि कम से कम उस समय तक उन्हें ऐसा कोई अनुभव नहीं था; ये बात उन्होंने स्वयं भी स्वीकार की है। बिना अनुभवों से गुज़रे कल्पनाओं के आधार पर प्रेम की विभिन्न अवस्थाओं का दर्द, पीड़ा, कसक, छेड़खानी और मीठेपन को महसूस करना सिर्फ़ क़ुदरत की देन ही कहलायेगी। माँ सरस्वती उनसे कुछ लिखवाना चाहती है, इसीलिए ये क़ुदरती देन उन्हें सहज रूप से मिली। बिना प्रेम किये, देखिये प्रेम पर किस गहराई के साथ..... -राज कौशिक