Librería Samer Atenea
Kálamo Books
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About the Book: कहते हैं तस्वीरें बोलती हैं बस, सुनने वाला चाहिए। इसका सबसे बड़ा प्रमाण पाषाणयुगीन भित्ति चित्र हैं जो निस्संदेह अपने युग के सामाजिक जीवन का सजीव दस्तावेज़ हैं। प्रसिद्ध चित्रकार प्रभाकर कोलते का मानना है कि चित्र की भाषा लिखी हुई भाषा से अलग होती है। लिखा हुआ हम पढ़ते, समझते हैं किंतु चित्रों को हम महसूस करते हैं। प्रस्तुत संग्रह में हर चित्र ने अपनी कही अपने ही अनोखे अंदाज़ में। रेखाओं-रंगों के ताने-बाने में शब्द टंकते गए, बूटे आप ही निखरते गए, चित्र मुखर होते गए। यूं ही तो नहीं कहा ' सुनने वाला चाहिए ....'