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कहानी का परिचय:’सोढा: राख से उभरा साम्राज्य’-यह कहानी है सोढा परिवार के छह भाइयों और उनकी मौसी (अम्मी) साजिदा के त्याग, समर्पण और अटूट पारिवारिक प्रेम की। 30 साल पुराना हैदराबाद रियासत का गुप्त राज़, सुल्तान और सेठ रहमत अली का खौफ, वर्दी में छुपे आस्तीन के सांप और अपनी ही सगी माँ ज़ीनत के खौफनाक रूप ’ग़ाज़ी’ का पर्दाफाश! अपने भाइयों की ढाल बनकर हर मुसीबत को अपने सीने पर झेलने वाले बड़े भाई सोढा इकबाल की यह एक ऐसी दास्तान है, जो आपके रोंगटे खड़े कर देगी। क्या 30 साल बाद परिवार एक हो पाएगा या किस्मत कोई नया पासा फेंकेगी? रोमांच और भावुकता से भरी एक संपूर्ण पारिवारिक गाथा। अस्वीकरण: यह कहानी पूरी तरह से काल्पनिक है। इस कहानी के सभी पात्र, घटनाएँ, स्थान और संवाद लेखक की कल्पना की उपज हैं। इसका किसी भी जीवित या मृत व्यक्ति, वास्तविक घटना, जाति, धर्म या किसी संस्थान से कोई संबंध नहीं है। यदि ऐसा कोई साम्य पाया जाता है, तो उसे केवल एक संयोग मात्र माना जाएगा। इस रचना का उद्देश्य किसी की भावनाओं को ठेस पहुँचाना नहीं, बल्कि केवल पाठकों का मनोरंजन करना है। सर्वाधिकार सुरक्षित। लेखक की अनुमति के बिना इस कृति के किसी भी अंश का पुनरुत्पादन या कॉपी करना गैर-कानूनी है।