Vishavambharnath Sharma Kaushik
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विशम्भरनाथ शर्मा कौशिक का जन्म सन् 1891 में अम्बाला छावनी में हुआ था। मात्र चार वर्ष की आयु में उनके दादाजी उन्हें कानपुर ले आए थे, जहाँ उन्होंने हिन्दी, संस्कृत, उर्दू और फारसी की शिक्षा प्राप्त की। उनका निधन 1945 में हो गया था। कौशिक जी की रुचि प्रथमतः उर्दू में थी, किंतु 1909 से वह हिन्दी की ओर आकर्षित हो गए। उनकी अधिकांश कहानियाँ चरित्रनिर्माण पर आधारित है। आधुनिक हिन्दी विकास में उनका स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। उनकी गणना प्रेमचंद, जयशंकर प्रसाद एवं गुलेरी जैसे प्रमुख कथाकारों के समकक्ष की जाती है।