LIBROS DEL AUTOR: vijay khaira kumar

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vijay khaira kumar Eliminar filtro Quitar filtros
  • Peer Parai Har Leta Hoon (पीर पराई हर लेता हूँ )
    Vijay Khaira Kumar
    डॉ. विजय खैरा की काव्यकृति 'पीर पराई हर लेता हूं' का प्रकाशन हिन्दी जगत की लोक मंगलकारी घटना है। इस काव्य-संग्रह में अभिव्यक्त उनके भावोदवेग जनमानस की संवेदनशीलता को न केवल झंकृत करते हैं, बल्कि उन्हें विवेकसम्मत दिशा भी प्रदान करते हैं। समाज को पीड़ा-मुक्त करने की अभिलाषा ने डॉ. खैरा की प्रतिभा को अनेक क्षेत्रों में विकसित किया है। पूज्य पिता स्वाधीनता संग्राम सेनानी एवं महान क...
    Disponible

    11,70 €