LIBROS DEL AUTOR: rangeya raghav

9 resultados para LIBROS DEL AUTOR: rangeya raghav

  • Devki Ka Beta
    Raghav Rangeya / Rangeya Raghav
    अपने उपन्यास 'देवकी का बेटा' में राघव जी ने जननायक श्रीकृष्ण का चरित्र ऐतिहासिक दृष्टि से प्रस्तुत किया है। इस उपन्यास में भगवान श्रीकृष्ण के जीवन के साथ संबद्ध अनेकानेक अलौकिक घटनाओं को लेखक ने वैज्ञानिक कसौटी पर रखकर उन सबका संगत अर्थ दिया है। लेखक ने उपन्यास में कृष्ण को एक महान् पुरुषार्थी, त्यागी, कर्मठ और जीवन को एक विशिष्ट मोड़ देने वाले एक सामान्य मनुष्य के रूप में चित्...
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    15,54 €

  • Kab Tak Pukaroon (कब तक पुकारूँ)
    Raghav Rangeya
    कब तक पुकारूँ रांगेय राघव द्वारा लिखा गया एक अद्भुत उपन्यास है। जिसमें राजस्थान और उत्तर प्रदेश की सीमा से जुड़ा ’बैर’ एक ग्रामीण क्षेत्र की कहानी कहता है। वहाँ नटों की भी बस्ती है। तत्कालीन जरायम पेशा करनटों की संस्कृति पर आधारित एक सफल आंचलिक उपन्यास है। सुखराम करनट अवैध सम्बन्ध से उत्पन नायक है। नट खेल तमाशे दिखाते हैं और नटनियाँ तमाशों के साथ-साथ दर्शकों को यौन संतुष्टि दे...
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    31,54 €

  • 21 Shreshtha Kahaniyan (21 श्रेष्ठ कहानियां)
    Raghav Rangeya
    रांगेय राघव (17 जनवरी, 1923 - 12 सितंबर, 1962) हिंदी के उन विशिष्ट और बहुमुखी प्रतिभा वाले रचनाकारों में से हैं जो बहुत ही कम उम्र लेकर इस संसार में आए, लेकिन जिन्होंने अल्पायु में ही एक साथ उपन्यासकार, कहानीकार, निबंधकार, आलोचक, नाटककार, कवि, इतिहासवेत्ता तथा रिपोर्ताज लेखक के रूप में स्वंय को प्रतिस्थापित कर दिया, साथ ही अपने रचनात्मक कौशल से हिंदी की महान सृजनशीलता के दर्शन...
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    20,95 €

  • Lakhima Ki Aankhen
    Raghav Rangeya
    इस उपन्यास में रानी लखिमा और विद्यापति की प्रेम कथा है। राजा शिवप्रसाद सिंह विद्यापति के आयदाता होने के साथ-साथ उनके मित्र भी थे। रांगेय राघव ने विद्यापति के दोनों भक्त व श्रृंगारी कवि रूपों का संघर्ष किया है। विद्यापति के जीवन गाथा के साथ ही तत्कालीन सामाजिक परिस्थितियों का वर्णन भी उपन्यास में सशक्त ढंग से आया है। ’लखिमा की आंखें’ में रांगेय राघव ने राजा शिवसिंह और विद्यापति...
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    16,79 €

  • Loi Ka Taana
    Raghav Rangeya
    ’लोई का ताना’ उपन्यास में कबीर की झाँकी है। ’लोई का ताना’ रांगेय राघव द्वारा लिया गया एक ऐसा चरित्रात्मक उपन्यास है। जिसमें हिन्दी साहित्य के महान् समाज सुधारक कवि व दार्शनिक संत कबीर की जीवन कहानी है। ’लोई कबीर की पत्नी है और कबीर ब्राह्मण विधवा से जन्मे थे तथा जुलाहा जाति दंपति से इनका पालन-पोषण हुआ था। ’लोई का ताना’ एक ऐसा उपन्यास है जिसके माध्यम से कबीर के जीवन द्वारा उस य...
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    16,73 €

  • Bharti Ka Saput
    Raghav Rangeya
    भारती का सपूत हिन्दी निर्माताओं में से एक भारतेन्दु हरिश्चन्द्र के जीवन पर आधारित अत्यन्त रोचक और मौलिक रचना है। भारतेन्दु हरिश्चन्द्र को आधुनिक हिन्दी का पितामह माना जाता है। महाकवि जगन्नाथ दास ’रत्नाकर’ ने उन्हें ’भारती का सपूत’ कहा था। उन्नीसवीं शताब्दी के मध्य में जब भारतेन्दु हरिश्चन्द्र हुए, तब अवधी और ब्रजभाषा से बाहर निकलकर दैनंदिनं प्रयोग की सरल खड़ी बोली का निर्माण ह...
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    16,79 €

  • Meri Bhav Baadha Haro
    Raghav Rangeya
    संगति सुमति न पावहीं परे कुमति कै धंध।राखौ मेलि कपूर मैं, हींग न होइ सुगंध॥जैसे 'रामचरितमानस' के लिए तुलसीदास प्रसिद्ध हुए ठीक उसी प्रकार ’सतसई’ के लिए बिहारीलाल प्रसिद्ध हुए। उपर्युक्त पद एक असाधारण उदाहरण है उनके कलेवर का। यह पुस्तक रांगेय राघव की पठनीय ही नहीं विश्वनीय भी है, जो आपको बिहारी के जीवन को नजदीक से देखने की सामर्थ्य रखती है। ...
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    16,73 €

  • Ratna Ki Baat
    Raghav Rangeya
    तुलसीदास की महानता का दायरा हम उनकी कालजयी रचना ’रामचरितमानस’ से लगा सकते है जो आज के समकालीन विश्व में भी प्रख्यात है हमारे आस-पास हो रही रामलीला की उत्पत्ति तुलसीदास की महत्त्वता को दर्शाती है यही वजह है कि हम उन्हें भक्त कवि के रूप में जानते हैं। यह रांगेय राघव की पुस्तक आपको तुलसीदास के भक्ति जीवन को नजदीक से समझने का अवसर देगी यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी की रांगेय राघव क...
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    16,73 €

  • Yashodhara Jeet Gai
    Raghav Rangeya
    रांगेय राघव जी इस उपन्यास की भूमिका में स्वयं बताते हैं कि इस उपन्यास की रचना का मूलस्रोत त्रिपिटक ग्रंथ रहे हैं उन्होंने त्रिपिटक ग्रंथों में महात्मा बुद्ध के जीवन से संबंधित जिन कथाओं को पढ़ा, उनके आधार पर ही उन्होंने इस उपन्यास के कथानक को गढ़ा किंतु एक बात वह स्पष्ट कहते हैं कि मैंने अपनी कथा का दृष्टिकोण ऐतिहासिक रखा है धार्मिक या राजनीतिक नहीं! वास्तव में इस उपन्यास में ...
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    16,79 €