LIBROS DEL AUTOR: premchand

232 resultados para LIBROS DEL AUTOR: premchand

  • Divine Justice and The Tale Of Two Oxen
    Munshi Premchand
    About the BookTIMELESS STORIES BY LITERARY MAESTRO MUNSHI PREMCHAND COME ALIVE IN A CONTEMPORARY COMIC VERSION.The Divine Justice (Khudai Fauzdar) explores the tangled dynamics of greed, power, morality and justice. The plot centres around Seth Nanakchand, a wealthy yet morally questionable man, who gets anxious after receiving threatening letters. Fearing for his fortune, whic...
    Disponible

    14,65 €

  • Samagra Dalit Kahaniyan (समग्र दलित कहानियां)
    Munshi Premchand
    मुंशी प्रेमचंद (धनपत राय श्रीवास्तव) को भारतीय साहित्य में ’कथा सम्राट’ के रूप में जाना जाता है, जिन्होंने अपनी लेखनी का उपयोग सामाजिक क्रांति और यथार्थवाद के लिए किया। ’प्रेमचंद की समग्र दलित कहानियाँ’ का संकलन उनके व्यापक सामाजिक सरोकार का प्रमाण है, जो उस समाज की मार्मिक गाथा प्रस्तुत करता है जिसे जातिगत भेदभाव और आर्थिक शोषण ने सदियों से दबा रखा था।इन कहानियों में प्रेमचंद ...
    Disponible

    30,40 €

  • 21 Dalit Kahaniyan (21 दलित कहानियां)
    Munshi Premchand
    ’प्रेमचंद की 21 दलित कहानियाँ’ भारतीय साहित्य के उस महत्त्वपूर्ण खंड को उजागर करती हैं, जहाँ महान कथाकार प्रेमचंद ने पहली बार परानुभूति की शक्ति से समाज के सबसे वंचित और शोषित वर्ग के जीवन को केंद्र में रखा। यह संकलन उस समय की गवाही देता है जब दलित-विमर्श एक संगठित आंदोलन नहीं था, लेकिन प्रेमचंद ने स्वामी विवेकानंद और महात्मा गांधी के मानवतावादी विचारों से प्रेरित होकर, सामाजिक...
    Disponible

    18,71 €

  • Gaban
    Premchand
    प्रेमचंद का उपन्यास ’गबन’ भारतीय समाज में नैतिकता, लालच और सम्मान की जटिल परिभाषाओं को गहराई से उजागर करता है। यह कहानी है रमेश और जालपा की; एक ऐसे दंपत्ति की जो वैभव और प्रतिष्ठा की चाह में धीरे-धीरे नैतिक पतन की ओर बढ़ते हैं। जालपा आभूषणों के मोह में बंधी है, और रमेश अपनी पत्नी को प्रसन्न करने के लिए झूठ और कर्ज के दलदल में फंसता चला जाता है। ’गबन’ केवल एक व्यक्ति की त्रुटि क...
    Disponible

    22,10 €

  • Karmabhoomi (कर्मभूमि)
    Munshi Premchand
    सामाजिक अन्याय, नैतिक मूल्यों और राजनीतिक जागरूकता पर आधारित ’कर्मभूमि’ मुंशी प्रेमचंद का एक कालजयी उपन्यास है। यह कहानी एक युवा आदर्शवादी अमर कुमार की है, जो समाज में व्याप्त जाति-पाति, शोषण और अन्याय के विरुद्ध संघर्ष करता है।अमर की यात्रा उसे व्यक्तिगत सुख-सुविधाओं से दूर कर समाज सेवा और देशप्रेम की राह पर ले जाती है। शिक्षा, स्वतंत्रता संग्राम, किसान आंदोलन और नैतिक उत्थान ...
    Disponible

    15,16 €

  • O meu percurso em Farmacologia
    Premchand Dandiya
    A era psicofarmacológica começou em 19 de janeiro de 1952, quando a clorpromazina foi administrada pela primeira vez a um doente psiquiátrico em Val-de-Grace, o famoso hospital militar de Paris. A partir de Val-de-Grace, a terapêutica com clorpromazina em psiquiatria percorreu os hospitais psiquiátricos de França no espaço de um ano; a 'revolução psicofarmacológica' estava bem ...
    Disponible

    54,25 €

  • Il mio viaggio nella farmacologia
    Premchand Dandiya
    L’era psicofarmacologica ebbe inizio il 19 gennaio 1952, quando la clorpromazina fu somministrata per la prima volta a un paziente psichiatrico a Val-de-Grace, il famoso ospedale militare di Parigi. Da Val-de-Grace, la terapia con clorpromazina in psichiatria si diffuse in un anno in tutti gli ospedali psichiatrici della Francia; la 'rivoluzione psicofarmacologica' era ormai be...
    Disponible

    54,25 €

  • Mon parcours en pharmacologie
    Premchand Dandiya
    L’ère psychopharmacologique a commencé le 19 janvier 1952, lorsque la chlorpromazine a été administrée pour la première fois à un patient psychiatrique au Val-de-Grâce, le célèbre hôpital militaire de Paris. Depuis le Val-de-Grâce, le traitement psychiatrique à la chlorpromazine s’est répandu dans tous les hôpitaux psychiatriques de France en l’espace d’un an ; la révolution p...
    Disponible

    54,25 €

  • Meine Reise in die Pharmakologie
    Premchand Dandiya
    Das psychopharmakologische Zeitalter begann am 19. Januar 1952, als Chlorpromazin zum ersten Mal einem psychiatrischen Patienten im Val-de-Grace, dem berühmten Militärkrankenhaus in Paris, verabreicht wurde. Von Val-de-Grace aus verbreitete sich die Chlorpromazin-Therapie in der Psychiatrie innerhalb eines Jahres in allen psychiatrischen Einrichtungen Frankreichs; die „psychoph...
    Disponible

    54,25 €

  • Premchandra ki prasiddh 31 kahaniyan
    Premchand
    प्रेमचंद की रचनाओं में उत्प्रेरक शक्ति निहित है। उनकी कहानियाँ पाठकों को सामाजिक असमानताओं के प्रति जागरूक करती हैं, उन्हें अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों का अहसास कराती हैं और व्यक्तिगत एवं सामाजिक सुधार की दिशा में प्रेरित करती हैं। इस पुस्तक के माध्यम से पाठक प्रेमचंद के सामाजिक दृष्टिकोण को गहराई से समझ सकते हैं, उनकी लेखनी की विविधता का अनुभव कर सकते हैं, और समाज में व्या...
    Disponible

    20,76 €

  • Premchandra ki prasiddh 51 kahaniyan
    Premchand
    पुस्तक में संकलित 51 कहानियाँ हमें केवल एक लेखक की दृष्टि से परिचित नहीं करातीं, बल्कि वे एक समाज सुधारक की भूमिका को भी स्थापित करती हैं। प्रेमचंद की रचनाएँ आज भी प्रासंगिक हैं, क्योंकि उन्होंने जिस सामाजिक संघर्ष को अपनी कहानियों में व्यक्त किया, वह आज भी समाज के विभिन्न हिस्सों में महसूस किया जाता है। इस पुस्तक को पढ़कर पाठक न केवल मनोरंजन प्राप्त करेंगे, बल्कि उन्हें अपने आ...
    Disponible

    31,30 €

  • Premashram
    Munshi Premchand
    प्रेमाश्रम भारत के तेज और गहरे होते हुए राष्ट्रीय संघर्षों की पृष्ठभूमि में लिखा गया उपन्यास है। गांधीजी के सत्याग्रह आन्दोलन की इस कथा पर विशिष्ट छाप है। रौलेट एक्ट, पंजाब में सैनिक कानून और जलियाँवाला बाग का दिन इसके कथानक की पृष्ठभूमि में है। इस उपन्यास के नायक प्रेमशंकर नये मनुष्य का जो आदर्श प्रेमचंद की कल्पना में था, उसे मूर्त करते हैं। वह धैर्यवान और सहनशील है, किन्तु अन...
    Disponible

    26,02 €

  • Kayakalp
    Premchand
    पढ़ लिख कर पैसा कमाना चक्रधर के जीवन का उद्देश्य न था। आदर्शों की स्थापना की चाह में ही वह दीवान साहब की सुंबरी कन्या मनोरमा के मन की बात जान कर भी उदासीन बने रहे और अनाथ अहल्या को अपना जीवनसाथी बना लिया। यही अहल्या जब जगदीशपुर के राजा साहब की पुत्री निकली तब भी धन और राज्य का लोभ चक्रघर को क्या बांध पाया? मनोरमा चक्रधर को भूल पाई? जीवनपथ पर चलते हुए चक्रधर अहल्या और मनोरमा की ...
    Disponible

    23,89 €

  • Ahankar
    Premchand
    ओ अभागे, निकम्मे, काबर पुरुष । ओ निराशा और विषात में डूबी हुई दुरात्मा! क्या तू मरने के लिए ही बनायी गयी है? क्या तू समझता है कि तू मृत्यु का स्वाद चख सकेगा? जिसने अभी जीवन का मर्म नहीं जाना, वह मरना क्या जाने? हाँ, अगर ईश्वर है, और मुझे वण्ड वे, तो मैं करने को तैयार हूँ। सुनता है ओ ईश्वर। मैं तुझसे घृणा करता हूँ, सुनता है? मैं तुझे कोसता हूँ। मुझे अपने अग्निवजों से भस्म कर वे,...
    Disponible

    13,34 €

  • Karbala
    Premchand
    कथा सम्राट प्रेमचंद द्वारा इस्लाम धर्म के संस्थापक हज़रत मुहम्मद के नवासे हुसैन की शहादत का सजीव एवं रोमांचक विवरण लिए हुए एक ऐतिहासिक नाटक है-कर्बला। इस मार्मिक नाटक में यह दिखाया गया है कि उस काल के मुस्लिम शासकों ने किस प्रकार मानवता प्रेमी व असहायों व निर्बलों की सहायता करने वाले हुसैन को परेशान किया और अमानवीय यातनाएँ देकर उसका कत्ल कर दिया। कर्बला के मैदान में लड़ा गया यह...
    Disponible

    15,42 €

  • Aazad Katha Bhag - 1
    Premchand
    हिंदी के महान उपन्यासकार और कथा सप्ताट प्रेमचंद ने हिंदी साहित्य में अपना नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज कराया। उन्होंने अनेक उपन्यास लिखे, जिनमें रंगभूमि, कर्मभूमि और गोदान मुख्य रूप से विख्यात हैं। प्रेमचंद ने उर्दू से हिंदी भाषा में भी रूपांतरण किया है। जिसमें ''आज़ाद कथा'' उनके द्वारा रूपांतरित उपन्यासों में से एक है. इसके रचयिता ’पंडित रतन नाथ ’सरशार’ हैं। जिनकी सबसे बड़ी रचन...
    Disponible

    21,78 €

  • Rangbhumi
    Premchand
    मितुआ ने पूछा- बाबा, अब हम रहेंगे कहाँ?सूरवास-दूसरा घर बनाएँगे।मिठुआ और कोई फिर आग लगा दे?सूरवास तो फिर बनाएँगे।मिठुआ और फिर लगा थे?सूरदासः तो हम भी फिर बनाएँगे।मिठुआ और कोई हज़ार बार लगा वे?सूरदास तो हम हज़ार बार बनाएँगे।बालकों को संख्याओं से विशेष रुचि होती है। मिठुआ ने फिर पूछा औरजो कोई सौ लाख बार लगा दे?सूरदास ने उसी बालोचित सरलता से उत्तर दिया तो हम भी सी लाख बार बनाएँगे।इ...
    Disponible

    31,25 €

  • Prema
    Premchand
    क्या ताकती हो, प्रेमा? मैं ऐसा मुर्ख नहीं हूँ, जैसा तुम समझती हो। मैंने भी आदमी देखें हैं और मैं भी आदमी पहचानता हूँ। मैं तुम्हारी एक-एक बात को गौर से देखता हूँ मगर जितना ही देखता हूँ उतना ही चित्त को दुःख होता है, क्योंकि तुम्हारा बर्ताव मेरे साथ फीका है। यद्यपि तुमको यह सुनना अच्छा न मालूम होगा मगर हार कर कहना पड़ता है कि तुमको मुझसे लेश-मात्र भी प्रेम नहीं है। मैंने अब तक इस ...
    Disponible

    12,07 €

  • Sangram
    Premchand
    प्रेमचंद की रचनाएं साधारण से साधारण पाठकों पर भी अपना प्रभाव छोड़ती हैं। अतः यही कारण है कि प्रेमचंद भारतीय समाज के सबसे अधिक पढ़े जाने वाले साहित्यकार हैं। संग्राम उनके द्वारा लिखा गया एक बहुचर्चित नाटक है जो किसान वर्ग को समर्पित है। इस पुस्तक के माध्यम से किसानों की आर्थिक समस्याओं, पुलिस द्वारा प्रताड़ित करना, जमींदारों द्वारा शोषण, भ्रष्ट बाबाओं द्वारा किए जाने वाले झूठे चमत्...
    Disponible

    13,23 €

  • Karmbhumi
    Premchand
    काशी (वर्तमान वाराणसी) निवासी लाला समरकांत की कठोरता एवं प्रताड़ना ने यदि अमर को घर से निकाला था, तो पत्नी की उपेक्षा से वह सकीना की मुहब्बत में फंस गया। लेकिन जब मुहब्बत का भेद खुल गया तो उस ने शहर ही छोड़ दिया और जन सेवा के मार्ग पर चल पड़ा। इकलौते पुत्र के चले जाने पर समरकांत और उन की पुत्रवधू सुखदा क्या अकेले रह सके? अथवा उन्होंने भी जन सेवा का मार्ग अपना लिया? फिर सकीना का क्...
    Disponible

    20,57 €

  • Nirmala
    Premchand
    समाज, सामाजिक संबंधों का जाल है। इन्हीं संबंधों के जाल की मर्यादा कायम रखने के लिए निर्मला का विवाह एक अधेड़ उम्र के व्यक्ति से कर दिया जाता है, जिसकी प्रथम विवाहिता से तीन बच्चे हैं। निर्मला अपने इस नए परिवार में व्यवस्थित जीवन व्यतीत करने की कोशिश कर रही है पर बाल मन होने के नाते वह उन परिस्थितियों से जूझने में असमर्थ है। अन्त में निर्मला की मृत्यु हो जाती है, जो इस अघम सामाज...
    Disponible

    13,25 €

  • Pratigya
    Premchand
    स्वियों को लेकर भारतीय समाज का रवैया हमेशा द्वंद्व से भरा हुआ रहा है। एक ओर हमारे यहाँ स्त्री को देवी का वर्जा दिया जाता है तो दूसरी ओर समय-समय पर उसका अपमान भी किया जाता है। इसी तरह का एक रवैया विधवा स्त्रियों को लेकर आज भी भारतीय समाज में प्रचलित है। प्रेमचन्द ने इस उपन्यास के माध्यम से इन्हीं पुरानी मान्यताओं पर बड़ा ही तीखा प्रहार किया है और इस प्रहार के नायक इस उपन्यास के ...
    Disponible

    12,19 €

  • Premchand ki Vikhyat Kahaniya
    Premchand
    प्रेमचंद का जन्म 31 जुलाई, 1880 को वाराणसी के निकट लमही ग्राम में हुआ था। उनके पिता अजायब राय पोस्ट ऑफिस में क्लर्क थे। वे अजायब राय व आनन्दी देवी की चौथी संतान थे। पहली दो लड़कियाँ बचपन में ही चल बसी थीं। तीसरी लड़की के बाद वे चौथे स्थान पर थे। माता पिता ने उनका नाम धनपत राय रखा।सात साल की उम्र से उन्होंने एक मदरसे से अपनी पढ़ाई-लिखाई की शुरुआत की जहाँ उन्होंने एक मौलवी से उर्...
    Disponible

    15,35 €

  • Gaban
    Premchand
    प्रेमचंद के कथा साहित्य की एक ख़ास विशेषता यह है कि वो किसी पारिवारिक कथानक को आधार बनाकर तत्कालीन औपनिवेशिक शासन की क्रूरता व भ्रष्टाचार के प्रति जनता को जागरूक करने का काम करते हैं। उनके उपन्यासों में कथा की शुरुआत किसी पारिवारिक समस्या से होती है और अंत राजनीतिक आन्दोलन के संघर्ष पर जाकर। गबन इसका एक अच्छा उदाहरण है। ऐसा इसीलिए हो पाता है क्योंकि साहित्य रचना के दौरान उनका व...
    Disponible

    19,53 €

  • Godan
    Premchand
    'लेकिन घर आकर उसने ज्योंही वह प्रस्ताव किया कि कुहराम मच गया। बनिया तो कम चिल्लाई, वोनों लड़कियों ने तो दुनिया सिर पर उठा ली। नहीं देते अपनी गाय, रुपये जहाँ से चाहो लाओ। सोना ने तो यहाँ तक कह डाला, इससे तो कहीं अच्छा है, मुझे बेच डालो। गाय से कुछ बेसी ही मिल जायेगा। होरी असमंजस में पड़ गया। दोनों लड़कियाँ सचमुच गाय पर जान देती थीं। रूपा तो उसके गले से लिपट जाती थी और बिना उसे ख...
    Disponible

    23,65 €

  • Vardaan
    Premchand
    विरजन ने पूछा-तुम मुझसे क्यों रुष्ट हो? मैंने कोई अपराध किया है?प्रताप-न जाने क्यों अब तुम्हें देखता हूँ, तो जी चाहता है कि कहीं चलाजाऊँ।विरजन-क्या तुमको मेरी तनिक भी मोह नहीं लगती? मैं विन-भर रोया करती हूँ। तुम्हें मुझ पर दया नहीं आती? तुम मुझसे बोलते तक नहीं।बतलाओ मैंने तुम्हें क्या कहा जो तुम रूठ गये?प्रताप-मैं तुमसे रूठा थोड़े ही हूँ।विरजन तो मुझसे बोलते क्यों नहीं?प्रताप म...
    Disponible

    13,23 €

  • Aazad Katha Bhag - 2
    Premchand
    हिंदी के महान उपन्यासकार और कथा सम्राट प्रेमचंद ने हिंदी साहित्य में अपना नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज कराया। उन्होंने अनेक उपन्यास लिखे, जिनमें रंगभूमि, कर्मभूमि और गोदान मुख्य रूप से विख्यात हैं। प्रेमचंद ने उर्दू से हिंदी भाषा में भी रूपांतरण किया है। जिसमें ''आजाद कथा'' उनके द्वारा रूपांतरित उपन्यासों में से एक है. इसके रचयिता ’पंडित रतन नाथ ’सरशार’ हैं। जिनकी सबसे बड़ी रचना...
    Disponible

    20,76 €

  • Sevasadan
    Premchand
    हिंदी साहित्य में प्रेमचंद का अपना विशिष्ट स्थान है। वह बीसवीं सदी के उन लेखकों में से हैं, जिन्होंने अपनी रचनाओं में यथार्थ की जीती-जागती तसवीर पाठकों के सामने रखी। उनकी अधिकांश रचनाएँ ग्रामीण भारत की पृष्ठभूमि में लिखी गई हैं। प्रेमचंद का जन्म 31 जुलाई, 1880 को लमही नामक गाँव में हुआ था। उनका पूरा नाम ’धनपत राय श्रीवास्तव’ था। सबसे पहले उन्होंने ’नवाबराय’ उपनाम से अपनी रचनाएँ...
    Disponible

    19,71 €

  • गोदान (Godaan) Original Hindi Version
    Dhanpat Rai Srivastava / Premchand Munshi
    गोदान - Godaanग्रामीण भारत की परिभाषित कथा ��������Background / पृष्ठभूमि:गोदान, प्रेमचंद की कालजयी रचना, भारतीय ग्रामीण जीवन का सजीव चित्रण है। This masterpiece delves into the social, economic, and moral struggles of rural India, capturing the essence of an era.Summary / संक्षिप्त विवरण:���� होरी, एक गरीब किसान, अपने परिवार और समाज के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करता है। उसकी स...
    Disponible

    16,31 €

  • Sevasadan (Hindi) - Sewasadan
    Munshi Premchand
    NA ...
    Disponible

    19,54 €


01 02 03 04 05 06 07 08