LIBROS DEL AUTOR: onkar vivek singh

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onkar vivek singh Eliminar filtro Quitar filtros
  • Kuchh Meetha Kuchh Khara
    Onkar ’Vivek’ Singh
    कुछ मीठा कुछ खारापन है,क्या-क्या स्वाद लिए जीवन है ग़ज़लकार ओंकार सिंह विवेक के ग़ज़ल संग्रह का यह टाइटल शेर बताता है कि जीवन के खट्टे-मीठे अनुभवों का निचोड़ है उनका नया ग़ज़ल-संग्रह ’कुछ मीठा कुछ खारा’। गहन संवेदनाओं के धनी ओंकार सिंह विवेक का इस संकलन का यह शेर देखिए ज़ह्न में इक अजीब हलचल है,शे’र ऐसे सुना गया कोई। इस शेर की गहराई यह समझने के लिए काफ़ी है कि ग़ज़ल के शे’र सड़क से...
    Disponible

    12,27 €