LIBROS DEL AUTOR: nishant jain

5 resultados para LIBROS DEL AUTOR: nishant jain

  • Sanki
    Nishant Jain
    आधे चार्टर्ड अकाउंटेंट और कभी पूरे स्टॉक ब्रोकर रहे निशान्त, आप सब की ही तरह, परिवार और रिश्तों को अहमियत देते हैं लेकिन व्यक्तिगत आज़ादी भी इनके लिए उतनी ही महत्वपूर्ण है। इनसे बात करना आपको सुकून देता है लेकिन इनके विचार आपको भीतर तक परेशान कर सकते हैं, झकझोर सकते हैं। इन्हें शुरु से ही पढ़ने का काफी शौक है और कुछ-कुछ लिखते भी रहते हैं। 2017 में एक बीमारी के बाद इन्होनें अपने ...
    Disponible

    12,91 €

  • Shor... Kolahal Se Aage
    Nishant Jain
    जैसा कि आप 'शोर... अंतर्मन का कोलाहल' में पढ़ चुके हैं कि यह कहानी अँधेरे से शुरू हुई थी और रौशनी की एक किरण के बाद अँधेरे में जा ठहरी। ज़िंदगी में ठहराव जरूरी होते हैं लेकिन वो ठहराव खतरनाक मोड़ ले लेते हैं जहाँ से आगे बढ़ने की वजह नज़र न आए। ज़िंदगी में जब चुनने के लिये कुछ न बचे तो नतीजा मौत के रूप में सामने आता है। यह किसी एक की कहानी नहीं है बल्कि इसके सभी किरदार चुनाव के लिए भट...
    Disponible

    18,80 €

  • Shor... Antarman ka Kolahal 'शोर... अंतर्मन का कोलाहल'
    Nishant Jain
    About the Book शोर... अंतर्मन का कोलाहल या कहें की शून्यता, बाहर की अव्यवस्थित व्यवस्था से अलग, चिंतित मन का व्यथित लेकिन व्यवस्थित सुर है जो किसी भी इंसान को जीने की वजह भी देता है और जीने का उद्देश्य भी लेकिन आख़िर यह शोर पनपता ही क्यूँ है? कौन सही है, कौन गलत? कौन आज़ाद है, कौन क़ैद? अजीब सवालों के ऐसे बवंडर में ज़िंदगी उलझ जाती है कि हर कदम पर चौराहा आ जाता है। जब आस-पास देखते ...
    Disponible

    18,79 €

  • Dumchhalla 'दुमछल्ला'
    Nishant Jain
    about the book जब इंसान अंदर से टूटता है तो वो अपनी बात समझाने के तरीके ढूँढने लगता है । और जब अंदर भावनाओं का ज्वार उठ रहा हो और सुनने वाला कोई न हो, तो वो खुद के लिए फैसलें लेता है । बेशक वो समाज की मान्यताओं में सही न हो लेकिन वो फिर भी अपने हक़ में फैसलें लेता है । यह कहानी है जागी आँखों से देखें जाने वाले सपनों की, उन अहसासों की, जिन्हें हम जीना चाहते हैं लेकिन जी नहीं पाते...
    Disponible

    16,67 €

  • Dumchhalla 'दुमछल्ला'
    Nishant Jain
    about the book जब इंसान अंदर से टूटता है तो वो अपनी बात समझाने के तरीके ढूँढने लगता है । और जब अंदर भावनाओं का ज्वार उठ रहा हो और सुनने वाला कोई न हो, तो वो खुद के लिए फैसलें लेता है । बेशक वो समाज की मान्यताओं में सही न हो लेकिन वो फिर भी अपने हक़ में फैसलें लेता है । यह कहानी है जागी आँखों से देखें जाने वाले सपनों की, उन अहसासों की, जिन्हें हम जीना चाहते हैं लेकिन जी नहीं पाते...
    Disponible

    16,67 €