LIBROS DEL AUTOR: nirala

17 resultados para LIBROS DEL AUTOR: nirala

  • Chaturi Chamar
    Suryakant Tripathi Nirala
    सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला छायावाद युग के ऐसे महान कवि, रचनाकार हैं, जिसने अपनी रचनाओं और कविताओं से युग-युगान्तर तक पाठकों पर अपनी छाप छोड़ी है। वे अपने निराले स्वभाव और निराली रचनाओं के रचयिता होने के कारण ’निराला’ कहलाए। महाकवि सूर्यकान्त त्रिपाठी अपने उपनाम की तरह वास्तव में निराले थे। उनकी कविताओं और रचनाओं में नवजागरण का संदेश एवं प्रगतिशील चेतना देखने को मिलती है। इस पुस...
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    11,94 €

  • Apsara (अप्सरा)
    Suryakant Tripathi ’Nirala’
    अप्सरा ’निराला’ की कथा-यात्रा का प्रथम सोपान है। अप्सरा-सी सुन्दर और कला-प्रेम में डूबी एक वीरांगना की यह कथा हमारे हृदय पर अमिट प्रभाव छोड़ती है। अपने व्यवसाय से उदासीन होकर वह अपना हृदय एक कलाकार को दे डालती है और नाना दुष्चक्रों का सामना करती हुई अंततः अपनी पावनता को बनाए रख पाने में समर्थ होती है। ...
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    17,88 €

  • Khayal Gaayan Ke Sandarbh Me Aadhunik Prachaar Prasaar Evam Sanchaar Maadhyamon Ka Sangeet Gharaanon Par Prabhav
    Dr. Om Prakash Nirwan ’Nirala’
    Indian music has become accessible to the masses, thanks to the contributions of the media, educational institutions, film music, and major industrial houses to traditional music education and grand music festivals. Audio and video recordings of renowned artists are readily available on social media and in the market. Improved transportation makes music festivals across the cou...
    Disponible

    22,60 €

  • Appelazijn helpt
    Nirala Zuurbier
    Appelazijn is een krachtig natuurlijk middel dat al sinds jaar en dag wordt gewaardeerd om zijn talloze gezondheidsvoordelen. Of je nu last hebt van maagzuur, hoofdpijn, eczeem, hooikoorts of slapeloosheid, appelazijn kan je helpen en ondersteunen.In dit boek leer je hoe je appelazijn kunt inzetten om je gezondheid te bevorderen, je energie te boosten en je weerstand te verhoge...
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    9,11 €

  • Suryakant Tripathi Nirala ki Prasiddh kavitayen
    Suryakant Nirala Tripathi
    सूर्यकांत त्रिपाठी ’निराला’ भारतीय साहित्य के प्रमुख कवि में से एक हैं। उनकी कविताएँ प्रेम, प्राकृतिक सौंदर्य, आत्म-समर्पण, समाजिक न्याय और धार्मिक विचारों पर आधारित हैं। उनकी कविताएँ गहरी भावनाओं और दर्शनशास्त्रीय तत्त्वों से भरी होती हैं। वे आधुनिक हिंदी साहित्य में अपनी अनूठी शैली के लिए प्रसिद्ध हैं। उनकी कविताएँ भारतीय समाज की समस्याओं और उसकी सांस्कृतिक विरासत से गहरा सं...
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    15,71 €

  • Gyarah Kahaniyan
    Nirala
    सूर्यकान्त त्रिपाठी ’निराला’ छायावाद युग के ऐसे महान कवि, रचनाकार हैं, जिसने अपनी रचनाओं और कविताओं से युग-युगान्तर तक पाठकों पर अपनी छाप छोड़ी है। वे अपने निराले स्वभाव और निराली रचनाओं के रचयिता होने के कारण ’निराला’ कहलाएँ। महाकवि सूर्यकान्त त्रिपाठी अपने उपनाम की तरह वास्तव में निराले थे। उनकी कविताओं और रचनाओं में नवजागरण का संदेश एवं प्रगतिशील चेतना देखने को मिलती है। इस...
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    12,26 €

  • Prabhavati (प्रभावती)
    Suryakant Tripathi / ’Nirala’
    महाकवि निराला के उपन्यास-साहित्य में प्रभावती एक ऐतिहासिक औपन्यासिक कृति के रूप में चर्चित है। इसका कथा-फलक पृथ्वीराज-जयचन्द-कालीन राजाओं और सामन्तों के पारस्परिक संघर्ष पर आधारित है। प्रभावती के स्वाभिमानी नारी-चरित्र के पीछे निराला का उद्देश्य आधुनिक भारतीयों के संघर्ष चेतना का विकास करना भी रहा है। ...
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    16,73 €

  • Alka (अलका)
    Suryakant Tripathi / ’Nirala’
    इस उपन्यास में निराला ने अवध क्षेत्र के किसानों और जन साधारण के अभावग्रस्त और दयनीय जीवन का चित्रण किया है। पृष्ठभूमि में स्वाधीनता आन्दोलन का वह चरण है जब प्रथमत विश्व यद्ध के बाद गांधीजी ने आन्दोलन की बागडोर अपने हाथों में ली थी। यही समय था जब शिक्षित और संपन्न समाज के अनेक लोग आन्दोलन में कूद पड़े। जिनमें वकील-बेरिस्टर और पूंजीपति तबके के नेता प्रमुख रूप से शामिल थे। इस नेत...
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    15,67 €

  • 21 Shreshtha Kahaniyan (21 श्रेष्ठ कहानियां)
    Suryakant Tripathi / ’Nirala’
    सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला’ का जन्म बंगाल की महिषादल रियासत (जिला मेदिनीपुर) में माघ शुक्ल ११, संवत् १९५५, तदनुसार २१ फरवरी, सन् १८९९ में हुआ था। वसंत पंचमी पर उनका जन्मदिन मनाने की परंपरा १९३० में प्रारंभ हुई। निराला की शक्ति यह है कि वे चमत्कार के भरोसे अकर्मण्य नहीं बैठ जाते और संघर्ष की वास्तविक चुनौती से आँखें नहीं चुराते। कहीं-कहीं रहस्यवाद के फेर में निराला वास्तविक जी...
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    18,89 €

  • Nirupama (निरुपमा)
    Suryakant Tripathi / ’Nirala’
    रचना क्रम की दृष्टि से निरुपमा निराला का चौथा उपन्यास है। पहले के तीन उपन्यासों-अप्सरा, अलका और प्रभावती की तरह इस उपन्यास का कथानक भी घटना-प्रधान है। स्वतंत्रता आन्दोलन के दिनों में, खासकर बंगाल में समाज-सुधार की लहर पूरे उभार पर थी। इसी समायावधि में निराला ने निरूपमा उपन्यास की रचना की। ...
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    15,67 €

  • Nirala ki Sampurna Kahaniyan
    Suryakant Tripathi Nirala
    हिंदी साहित्य में सूर्यकान्त त्रिपाठी ’निराला’ एक ऐसे साहित्यकार रहे हैं, जिन्होंने ख़ुद को, बरसों से चली आ रही साहित्य की परिपाटी के प्रवाह में बहने नहीं दिया, बल्कि वे हमारे सामने युग निर्माण की प्रक्रिया में एक महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा करने के रूप में प्रस्तुत हुए। निराला का जीवन सतत् संघर्षों के घिराव में गुजरा, लेकिन इस संघर्ष ने उनके साहित्य की क्रांति को प्रतिबद्ध नहीं कि...
    Disponible

    16,47 €

  • Nirupama
    Suryakant Tripathi Nirala
    हिंदी साहित्य में सूर्यकान्त त्रिपाठी ’निराला’ एक ऐसे साहित्यकार रहे हैं जिन्होंने ख़ुद को वर्षों से चली आ रही साहित्य की परिपाटी के प्रवाह में बहने नहीं दिया, बल्कि वे हमारे सामने युग निर्माण की प्रक्रिया में एक महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा करने के रूप में प्रस्तुत हुए। निराला का जीवन सतत् संघर्षों के घिराव में गुज़रा, लेकिन इस संघर्ष ने उनके साहित्य की क्रांति को प्रतिबद्ध नहीं किया...
    Disponible

    12,14 €

  • Kulli Bhat
    Suryakant Tripathi Nirala
    हिंदी साहित्य में सूर्यकान्त त्रिपाठी ’निराला’ एक ऐसे साहित्यकार रहे हैं जिन्होंने ख़ुद को वर्षों से चली आ रही साहित्य की परिपाटी के प्रवाह में बहने नहीं दिया, बल्कि वे हमारे सामने युग निर्माण की प्रक्रिया में एक महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा करने के रूप में प्रस्तुत हुए। निराला का जीवन सतत् संघर्षों के घिराव में गुज़रा, लेकिन इस संघर्ष ने उनके साहित्य की क्रांति को प्रतिबद्ध नहीं किया...
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    10,72 €

  • Chotee kee Pakad
    Suryakant Tripathi Nirala
    हिंदी साहित्य में सूर्यकान्त त्रिपाठी ’निराला’ एक ऐसे साहित्यकार रहे हैं जिन्होंने ख़ुद को वर्षों से चली आ रही साहित्य की परिपाटी के प्रवाह में बहने नहीं दिया, बल्कि वे हमारे सामने युग निर्माण की प्रक्रिया में एक महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा करने के रूप में प्रस्तुत हुए। निराला का जीवन सतत् संघर्षों के घिराव में गुज़रा, लेकिन इस संघर्ष ने उनके साहित्य की क्रांति को प्रतिबद्ध नहीं किया...
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    13,34 €

  • Billesur Bakariha
    Suryakant Tripathi Nirala
    हिंदी साहित्य में सूर्यकान्त त्रिपाठी ’निराला’ एक ऐसे साहित्यकार रहे हैं जिन्होंने ख़ुद को वर्षों से चली आ रही साहित्य की परिपाटी के प्रवाह में बहने नहीं दिया, बल्कि वे हमारे सामने युग निर्माण की प्रक्रिया में एक महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा करने के रूप में प्रस्तुत हुए। निराला का जीवन सतत् संघर्षों के घिराव में गुज़रा, लेकिन इस संघर्ष ने उनके साहित्य की क्रांति को प्रतिबद्ध नहीं किया...
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    11,50 €

  • Lambi kavitayein
    Suryakant Tripathi Nirala
    हिंदी साहित्य में सूर्यकान्त त्रिपाठी ’निराला’ एक ऐसे साहित्यकार रहे हैं जिन्होंने ख़ुद को वर्षों से चली आ रही साहित्य की परिपाटी के प्रवाह में बहने नहीं दिया, बल्कि वे हमारे सामने युग निर्माण की प्रक्रिया में एक महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा करने के रूप में प्रस्तुत हुए। निराला का जीवन सतत् संघर्षों के घिराव में गुज़रा, लेकिन इस संघर्ष ने उनके साहित्य की क्रांति को प्रतिबद्ध नहीं किया...
    Disponible

    15,63 €

  • Apsara
    Suryakant Tripathi Nirala
    हिंदी साहित्य में सूर्यकान्त त्रिपाठी ’निराला’ एक ऐसे साहित्यकार रहे हैं जिन्होंने ख़ुद को वर्षों से चली आ रही साहित्य की परिपाटी के प्रवाह में बहने नहीं दिया, बल्कि वे हमारे सामने युग निर्माण की प्रक्रिया में एक महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा करने के रूप में प्रस्तुत हुए। निराला का जीवन सतत् संघर्षों के घिराव में गुज़रा, लेकिन इस संघर्ष ने उनके साहित्य की क्रांति को प्रतिबद्ध नहीं किया...
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    14,44 €