LIBROS DEL AUTOR: bankimchnadra chattopadhyay

6 resultados para LIBROS DEL AUTOR: bankimchnadra chattopadhyay

bankimchnadra chattopadhyay Eliminar filtro Quitar filtros
  • Rajani
    Bankimchnadra Chattopadhyay
    बांग्ला भाषा के प्रसिद्ध लेखक बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय का जन्म 27 जून, 1838 ई. को बंगाल के 24 परगना जिले के कांठल पाड़ा नामक गाँव में एक सम्पन्न परिवार में हुआ था। बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय बांग्ला के शीर्षस्थ उपन्यासकार है। उनकी लेखनी से बांग्ला साहित्य तो समृद्ध हुआ ही है, हिन्दी भी उपकृत हुई है। वे ऐतिहासिक उपन्यास लिखने में सिद्धहस्त थे। वे भारत के एलेक्जेंडर ड्यूमा माने जाते...
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    15,57 €

  • Vish Vriksha
    Bankimchnadra Chattopadhyay
    जिस विष-वृक्ष के बीज रोपने से लेकर फलोत्पत्ति व फल-भोग तक का आख्यान आप पढ़ रहे हैं, वह सभी के घर-आंगन में रोपा हुआ है। दुश्मन का प्राबल्य इसका बीज है, जो घटनाधीन होकर सारे क्षेत्र में व्याप्त होता है। कोई ऐसा मनुष्य नहीं है, जिसका चित्त राग-द्वेष, काम-क्रोध आदि से अछूता हो। ज्ञानी व्यक्ति भी घटनाधीन होकर इन सारे दुश्मनों से विचलित हो जाते हैं। लेकिन मनुष्य, मनुष्य में अन्तर यह ह...
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    15,51 €

  • Mrinalini
    Bankimchnadra Chattopadhyay
    बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय का जन्म सन् 1838 को एक ख़ुशहाल बंगाली परिवार में हुआ था। वे बांग्ला भाषा के प्रख्यात उपन्यासकार एवं कवि थे।बंकिमचन्द्र ने भारतीय मानवीय भावों को सहज शब्दों में दर्शाया है। धर्म, समाज, जाति एवं राजनीति मुद्दों पर विस्तृत रूप से प्रकाश डाला है, भारतीय मध्यमवर्गीय परिवार इनकी रचनाओं में अपनी छवि को देखता है। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम व क्रांतिकारियों के लिए...
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    12,98 €

  • Kapal Kundla
    Bankimchnadra Chattopadhyay
    खेत में बीज पड़ जाए तो वह अपने आप अंकुरित हो जाता है। जब बीज अंकुरित होता है, तब कोई जान नहीं पाता- कोई देख नहीं पाता। किन्तु एक बार बीज पड़ जाए और बीज डालने वाला कहीं भी क्यों न रहे धीरे-धीरे अंकुर से वृक्ष सिर ऊँचा कर खड़ा हो जाता है। शुरू में वृक्ष उंगली बराबर होता है, जिसे देखकर भी कोई देख नहीं पाता। क्रमशः वह तिल-तिल बढ़ता जाता है और फिर वृक्ष आधा हाथ, एक हाथ, दो हाथ के बराबर ...
    Disponible

    15,57 €

  • Durgeshnandini
    Bankimchnadra Chattopadhyay
    बांग्ला भाषा के प्रसिद्ध लेखक बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय का जन्म 27 जून, 1838 ई. को बंगाल के 24 परगना जिले के कांठल पाड़ा नामक गाँव में एक सम्पन्न परिवार में हुआ था। बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय बांग्ला के शीर्षस्थ उपन्यासकार है। उनकी लेखनी से बांग्ला साहित्य तो समृद्ध हुआ ही है, हिन्दी भी उपकृत हुई है। वे ऐतिहासिक उपन्यास लिखने में सिद्धहस्त थे। वे भारत के एलेक्जेंडर ड्यूमा माने जाते...
    Disponible

    13,10 €

  • Devi Chaudharani
    Bankimchnadra Chattopadhyay
    घर में प्रवेश करने के लिए माँ के कदम नहीं उठ रहे थे। प्रफुल्ल को गरीब लड़की समझकर हरबल्लभ बाबू नफ़रत करते हों, ऐसी बात नहीं थी। शादी के बाद एक घपला हुआ था। हरबल्लभ ने तो गरीब देखकर ही अपने बेटे का ...
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    15,57 €