LIBROS DEL AUTOR: ashok kaushik

6 resultados para LIBROS DEL AUTOR: ashok kaushik

  • Yogiraj Arvind (योगीराज अरविन्द)
    Ashok Kaushik
    जहां दूसरे लोग देश को एक जड़ वस्तु, कुछ मैदान, जंगल, पहाड़ और नदी समझते हैं, वहां मैं अपने देश को अपनी माता मानता हूं। मैं उसकी पूजा करता हूं और मां की भांति उसकी भक्ति करता हूं। जब कोई राक्षस मां की छाती पर बैठ कर उसका खून चूस रहा हो तो उस समय उसका पुत्र क्या करेगा ? क्या वह चुपचाप अपने खान-पान में लगा रहेगा और अपने परिवार के साथ मौज मनाता रहेगा? या इसके बदले में मां को बचाने ...
    Disponible

    15,51 €

  • Panchtantra Ki Kahaniyan (पंचतंत्र की कहानियां)
    Ashok Kaushik
    भारतीय साहित्य की लोक एवं नीति कथाएं विश्व में अपना विशिष्ट स्थान नाये हुए हैं। इन लोकनीति कथाओं के स्रोत हैं, संस्कृत साहित्य की अमर कृतियां - हितोपदेश एवं पंचतंत्र।पचतंत्र में इसके रचयिता श्री विष्णु शर्मा ने राजकुमारों को राजनीति - विशारद बनाने के लिए अनेक पशु-पक्षियों को माध्यम बनाकर नीति की कथाएं कही हैं। वे कथाएं और उनके बीच में आयी हुई सूक्तियां आज के इस आपा-धापी के युग ...
    Disponible

    20,76 €

  • Yug Pravartak Mahatama Budh (युग प्रवर्तक महात्मा बुद्ध)
    Ashok Kaushik
    सरस्वती, प्रयाग, गया, बाहुमती, सुन्दरिका आदि नदियों में पापकर्मी मूढ़ चाहे जितना स्नान करें, वे शुद्ध नहीं होंगे। ये नदियां पापकर्मी को शुद्ध नहीं कर सकतीं। शुद्ध मनुष्य के लिये तो सर्वत्रा ही गया है। शुद्ध तथा शुचिकर्मा के व्रत सदा पूर्ण होते हैं। यदि तुम मिथ्या भाषण नहीं करते, बिना दिये लेते नहीं, श्रद्धावान् हो, मत्सर रहित हो, तो ’गया’ जाने से क्या लाभ? क्षुद्र जलाशय भी तुम्...
    Disponible

    14,42 €

  • Bharat Ke Mahan Swatantrata Senani
    Ashok Kaushik
    मानव जीवन में संस्कारों का बहुत बड़ा महत्त्व है। संस्कारों के द्वारा सद्गुणों का विकास करके समाज में उपयोगी बनना है । संस्कार का अर्थ होता है व्यक्तित्व को सजाना, संवारना, उच्च और स्वच्छ बनाना। इन्हीं संस्कारों में पण्डित मदनमोहन मालवीय जी पले थे।ऐसे संस्कारों से ही महामना मदनमोहन मालवीय जी अपने त्याग, धर्मरक्षा, भक्ति, सात्विकता, पवित्रता, धर्मनिष्ठा, आत्मत्याग आदि सद्गुणों क...
    Disponible

    17,86 €

  • Abhigyan Shakuntalam (अभिज्ञान शाकुंतलम)
    Kaushik Ashok
    कालिदास सम्राट विक्रमादित्य के नररत्नों में से एक थे। उन्हें संस्कृत साहित्य में मूर्धन्य कवि माना जाता है। उनकी सभी काव्य-कृतियां काव्य-मनीषियों द्वारा प्रशंसित हुई हैं। पर उनकी नाट्यकृति ’अभिज्ञान शाकुन्तलम्’ में उनकी साहित्यिक प्रतिभा ने जो कमाल दिखाया है, यह बेजोड़ है।जर्मन कवि गेटे के अनुसार- यदि तुम युवावस्था के फूल, प्रौढ़ावस्था के फल और अन्य ऐसी सामग्रियां एक ही स्थान पर...
    Disponible

    16,80 €

  • Kautilaya Arthshashtra
    Ashok Kaushik
    अधिकांश लोग ’कौटिल्य अर्थशास्त्र’ को इकोनॉमिकल शास्त्र (वाणिज्य व धन संबंधी अध्ययन ग्रंथ) जानते हैं लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं है, वस्तुतः यह तो राज्य-व्यवस्था का विवरणात्मक व निर्देशित अध्ययन ग्रंथ है, जो विश्व प्रसिद्ध है। रचनाकार कौटिल्य का ही एक नाम चाणक्य था। उन्होंने इस ग्रंथ की रचना कर राज्य-व्यवस्था और प्रजा-पालन का बृहद ज्ञान प्रस्तुत किया है। यह मूल रूप से संस्कृत भाषा में...
    Disponible

    16,50 €