LIBROS DEL AUTOR: acharya chatursen

52 resultados para LIBROS DEL AUTOR: acharya chatursen

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  • Dhahati Hui Deewar (ढहती हुई दीवार)
    Acharya Chatursen
    आचार्य चतुरसेन शास्त्री हिंदी साहित्य के उन दिग्गज लेखकों में से हैं जिन्होंने इतिहास और समाज के अंतर्विरोधों को बहुत गहराई से उकेरा है। उनके उपन्यास ’ढहती हुई दीवार’ को उनके सबसे सशक्त सामाजिक और मनोवैज्ञानिक कार्यों में से एक माना जाता है।’ढहती हुई दीवार’ केवल एक शीर्षक नहीं, बल्कि पुरानी मान्यताओं, जर्जर सामाजिक परंपराओं और टूटते हुए नैतिक मूल्यों का प्रतीक है। यह उपन्यास एक...
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    16,63 €

  • Apradhi (अपराधी)
    Acharya Chatursen
    आचार्य चतुरसेन शास्त्री का उपन्यास ’अपराधी’ उनके सामाजिक उपन्यासों की श्रेणी में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और विचारोत्तेजक कृति है। यह पुस्तक समाज द्वारा तय किए गए ’अपराध’ और ’न्याय’ के मापदंडों पर गंभीर सवाल खड़े करती है।इस उपन्यास में चतुरसेन जी ने यह दिखाने का प्रयास किया है कि कोई व्यक्ति जन्म से अपराधी नहीं होता, बल्कि समाज की विषमताएँ, परिस्थितियाँ और व्यवस्था का अन्याय उसे अप...
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    16,61 €

  • Us Paar (उस पार)
    Acharya Chatursen
    आचार्य चतुरसेन शास्त्री ऐतिहासिक और सामाजिक उपन्यासों के बेताज बादशाह माने जाते हैं। उनका उपन्यास ’उस पार’ उनकी अन्य चर्चित कृतियों की तरह ही मानवीय भावनाओं और सामाजिक मर्यादाओं के द्वंद्व को बहुत ही प्रभावशाली ढंग से चित्रित करता है।’उस पार’ मुख्य रूप से मानवीय संबंधों की उन सीमाओं और रहस्यों की खोज करता है, जिन्हें समाज अक्सर अनदेखा कर देता है। आचार्य चतुरसेन ने इस उपन्यास मे...
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    15,58 €

  • Neelmani (नीलमणि)
    Acharya Chatursen
    आचार्य चतुरसेन शास्त्री के विशाल कथा-साहित्य में ’नीलमणि’ एक विशिष्ट स्थान रखती है। यह उपन्यास शास्त्री जी की उस अद्भुत कला का उदाहरण है जिसमें वे इतिहास, कल्पना और मानवीय भावनाओं को एक सूत्र में पिरो देते हैं।’नीलमणि’ मुख्य रूप से समर्पण, प्रेम और राजसी मर्यादाओं के बीच झूलती एक मर्मस्पर्शी कहानी है। आचार्य चतुरसेन ने इसमें नारी के हृदय की कोमलता और उसकी अडिग शक्ति का चित्रण क...
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    14,49 €

  • Aag Aur Dhuan (आग और धुआं)
    Acharya Chatursen
    आचार्य चतुरसेन शास्त्री द्वारा रचित उपन्यास ’आग और धुआं’ उनके अन्य ऐतिहासिक उपन्यासों की तुलना में एक विशिष्ट और गंभीर रचना है। यह उपन्यास मुख्य रूप से सामाजिक और राजनीतिक चेतना के इर्द-गिर्द बुना गया है, जिसमें मानवीय संबंधों की जटिलताओं और समाज के अंतर्विरोधों को गहराई से उकेरा गया है।कथानक और विषय-वस्तुः इस उपन्यास का शीर्षक ’आग और धुआं’ स्वयं में एक गहरा अर्थ समेटे हुए है। ...
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    15,55 €

  • Sona Aur Khoon
    Acharya Chatursen
    आचार्य चतुरसेन शास्त्री का जन्म 26 अगस्त, 1891 को भारत में उत्तर प्रदेश राज्य के बुलंदशहर जिले के एक छोटे से गाँव औरंगाबाद चंडोक (अनूपशहर के पास) में हुआ था। उनके पिता पंडित केवाल राम ठाकुर थे और माता नन्हीं देवी थीं। उनका जन्म का नाम चतुर्भुज था। अपनी प्राथमिक शिक्षा समाप्त करने के बाद उन्होंने राजस्थान के जयपुर के संस्कृत कॉलेज में दाखिला लिया जहाँ से उन्होंने वर्ष 1915 में आ...
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    24,04 €

  • Sona Aur Khoon
    Acharya Chatursen
    आचार्य चतुरसेन शास्त्री का जन्म 26 अगस्त, 1891 को भारत में उत्तर प्रदेश राज्य के बुलंदशहर जिले के एक छोटे से गाँव औरंगाबाद चंडोक (अनूपशहर के पास) में हुआ था। उनके पिता पंडित केवाल राम ठाकुर थे और माता नन्हीं देवी थीं। उनका जन्म का नाम चतुर्भुज था। अपनी प्राथमिक शिक्षा समाप्त करने के बाद उन्होंने राजस्थान के जयपुर के संस्कृत कॉलेज में दाखिला लिया जहाँ से उन्होंने वर्ष 1915 में आ...
    Disponible

    21,96 €

  • Sona Aur Khoon
    Acharya Chatursen
    आचार्य चतुरसेन शास्त्री का जन्म 26 अगस्त, 1891 को भारत में उत्तर प्रदेश राज्य के बुलंदशहर जिले के एक छोटे से गाँव औरंगाबाद चंडोक (अनूपशहर के पास) में हुआ था। उनके पिता पंडित केवाल राम ठाकुर थे और माता नन्हीं देवी थीं। उनका जन्म का नाम चतुर्भुज था। अपनी प्राथमिक शिक्षा समाप्त करने के बाद उन्होंने राजस्थान के जयपुर के संस्कृत कॉलेज में दाखिला लिया जहाँ से उन्होंने वर्ष 1915 में आ...
    Disponible

    20,90 €

  • Sona Aur Khoon
    Acharya Chatursen
    आचार्य चतुरसेन शास्त्री का जन्म 26 अगस्त, 1891 को भारत में उत्तर प्रदेश राज्य के बुलंदशहर जिले के एक छोटे से गाँव औरंगाबाद चंडोक (अनूपशहर के पास) में हुआ था। उनके पिता पंडित केवाल राम ठाकुर थे और माता नन्हीं देवी थीं। उनका जन्म का नाम चतुर्भुज था। अपनी प्राथमिक शिक्षा समाप्त करने के बाद उन्होंने राजस्थान के जयपुर के संस्कृत कॉलेज में दाखिला लिया जहाँ से उन्होंने वर्ष 1915 में आ...
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    20,86 €

  • Ambapalika and Other Stories
    Acharya Chatursen Shastri / Gurudev Meher
    Acharya Chatursen’s Ambapalika and Other Stories brings together twenty-eight of the finest short stories by one of Hindi literature’s most versatile and celebrated masters. Acharya Chatursen Shastri (1891-1960) was a novelist, essayist, historian, and physician whose works combined scholarly depth with literary imagination. In this collection, his narratives span the sweep of ...
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    21,98 €

  • DEVANGANA (The God’s Maiden)
    Acharya Chatursen Shastri / Gurudev Meher
    In 12th-century Vikramashila, merchant Dhananjaya Seth offers his beloved son Divodas to the Buddhist order. Renamed Dharmanuj, the young monk’s piety soon clashes with the sinister tantric practices of Acharya Vajrasiddhi, who schemes to seize wealth and power. Cast into a subterranean prison, Dharmanuj is aided by his loyal steward, Sukhdas, disguised as a monk, and drawn to ...
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    19,05 €

  • Dhamorakshati
    Acharya Chatursen
    यदुवंशियों में श्रेष्ठ महाराज शूरसेन के यहाँ एक कन्या ’पृथा’ ने जन्म लिया। उन्होंने अपने निस्संतान फुफेरे भाई राजा कुंतिभोज को वह कन्या दे दी। कुंतिभोज ने पृथा का बड़े प्यार से लालन-पालन किया। आयु के साथ-साथ उनके गुण भी बढ़ते गए। वयस्क होने पर कुंतिभोज ने पृथा को देवताओं के पूजन और अतिथियों के सत्कार का कार्य सौंपा। एक समय वहाँ महर्षि दुर्वासा आए। पृथा उनकी सेवा करने लगी। पृथा ...
    Disponible

    21,91 €

  • Vayam Rakshamah
    Acharya Chatursen
    NA ...
    Disponible

    34,89 €

  • Sona aur Khoon (Bhaag -2)
    Acharya Chatursen
    NA ...
    Disponible

    23,18 €

  • Sona aur Khoon (Bhaag -1)
    Acharya Chatursen
    NA ...
    Disponible

    23,21 €

  • Vaishali Ki Nagarvadhu
    Acharya Chatursen
    NA ...
    Disponible

    33,75 €

  • Sona aur Khoon (Bhaag -3)
    Acharya Chatursen
    NA ...
    Disponible

    24,27 €

  • Goli
    Acharya Chatursen
    NA ...
    Disponible

    22,13 €

  • Sona aur Khoon (Bhaag -4)
    Acharya Chatursen
    NA ...
    Disponible

    26,33 €

  • Somnath
    Acharya Chatursen
    NA ...
    Disponible

    31,70 €

  • Sona aur Khoon (Bhaag -3)
    Acharya Chatursen
    शहादरे में भगियों के चौधरी छुट्टन की बेटी का ब्याह था और उसी दिन उसके यहाँ बारात आपी थी, जिस दिन चौधरी रूपराम का काफिला शहादरा आकर पहुँचा, संयोग ऐसा हुआ कि छुट्टन मेहतर के यहाँ बारात तो आ पहुँची थी पर भात नहीं आया था। भात आने वाला था हापुड़ ही से। आम दस्तूर था कि जब तक भात न आ जाता था, लड़की का ब्याह नहीं हो सकता था। भात लाने का हक लड़‌की लड़के के मामा का होता है। भात लाने वाला...
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    22,84 €

  • Sona aur Khoon (Bhaag -1)
    Acharya Chatursen
    ईस्ट इण्डिया कम्पनी इंग्लैंड की पार्लियामेंट के कानून द्वारा कायम हुई थी। कम्पनी के अधिकारों को कायम रखने के लिए पार्लियामेंट हर बीस बरस बाद नया कानून पास करती थी, जिसे चार्टर एक्ट कहते थे। सन् 1813 में जो चार्टर एक्ट बनाया गया उसमें इंग्लैंड का बना माल भारत के सिर मढ़ने और भारत के प्राचीन उद्योग-धंधों का नाश करने का विधिवत् प्रयत्न किया गया। वही एक्ट भारत की भारी भयंकर दरिद्रत...
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    19,71 €

  • Sona aur Khoon (Bhaag -2)
    Acharya Chatursen
    वही सख्त सर्दी थी। पेरिस गहरे कुहरे में डूबा हुआ था। मार्च का महीना था। उन दिनों पेरिस में सन्नाटा छाया हुआ था। यद्यपि अब दस बज चुके थे, पर सड़कों पर इक्को-दुक्के ही आदमी नजर पड़ते थे। गली-कूचे सुनसान थे। लोगों के मुँहपर हवाइयों उड़ रही थी। लुई की हत्या के बाद यूरोप-भर फ्रांस का दुश्मन हो गया था और यूरोप की शक्तियों ने उसे चारों ओर से घेर रखा था। इग्लैंड ने तो उसके कई इलाके दबो...
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    22,88 €

  • Dharamputra
    Acharya Chatursen
    ''यदि मैं भारत, ब्रिटेन, अमेरिका तथा धुरी राष्ट्रों समेत शेष संसार को अहिंसा की ओर ले जा सकता, तो मैं ऐसा कर डालता; पर यह चमत्कार तो केवल परमात्मा के हाथ में है। अब मेरे हाथ तो केवल यही है, कि करूँ या मरूं। आपको पत्नी-परिजनों का मोह त्याग देना होगा। संसार में सब कुछ छोड़ देना होगा। मैं चाहता हूँ, कि अब विरोधी अंग मिलकर भारत को विदेशी शासन से मुक्त कर लें, चाहे इसके लिए उन्हें क...
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    14,44 €

  • Somnath
    Acharya Chatursen
    डॉ. श्यामसुंदर दास जन्म : 1875 ई. में काशी में। शिक्षा : 1897 ई. में बी.ए. (स्नातक) पास किया। सन् 1921 ई. में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग के अध्यक्ष पद पर नियुक्त किये गये । नागरी प्रचारिणी सभा की स्थापना आपने अपने विद्यार्थी जीवन से ही अपने सहयोगियों की सहायता से की थी। हिन्दी साहित्य सम्मेलन ने आपको ’साहित्य वाचस्पति’ और काशी विश्वविद्यालय ने ’डी.लिट्.’ की उपाध...
    Disponible

    22,88 €

  • Vayam Rakshamah Parishisht evam chitra sahit
    Acharya Chatursen
    अब लक्ष्मण ने सात बाण धनुष पर चढ़ाकर रावण की ध्वजा काट डाली। इसी समय रावण की दृष्टि विभीषण पर पड़ी। उसने तत्काल बिजली की भांति दीप्तिमती महाशक्ति उसपर फेंकी। परन्तु लक्ष्मण ने उसे बीच में ही तीन बाणों से काट डाला। इस प्रकार लक्ष्मण के हाथों विभीषण की रक्षा होते देख रावण क्रोध से सर्प की भांति फुफकारने लगा। उसने कहा- ’अरे सौमित्रि, तेरे हस्तलाघव की प्रशंसा करता हूं। तुझमें शक्तिधर...
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    32,53 €

  • Dharmputra
    Acharya Chatursen
    धर्मपुत्र (ईश्वर पुत्र) एक प्रतिष्ठित हिंदू डॉक्टर के सबसे बड़े बेटे दिलीप की कहानी है। वह एक कट्टर हिंदू है जो भारत में हिंदू गौरव के पुनरुत्थान में उतना ही दृढ़ता से विश्वास करता है जितना कि ब्रिटिश शासन से देश की स्वतंत्रता में। वे राष्ट्रीय संघ में राजनीतिक रूप से सक्रिय रहते हुए धार्मिक जीवन जीते हैं। वह एक धर्मनिष्ठ हिंदू लड़की से शादी करना भी पसंद करते हैं जो सीता और सा...
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    16,74 €

  • Aag aur Dhuaan
    Acharya Chatursen
    26 अगस्त, 1891 को बुलंदशहर के चंदोक में जन्मे आचार्य चतुरसेन शास्त्री ने 32 उपन्यास, 450 कहानियाँ और अनेक नाटकों का सृजन कर हिन्दी साहित्य को समृद्ध किया । ऐतिहासिक उपन्यासों के माध्यम से उन्होंने कई अविस्मरणीय चरित्र हिन्दी साहित्य को प्रदान किए। अपनी समर्थ भाषा शैली के चलते शास्त्रीजी ने अद्भुत लोकप्रियता हासिल की और वह जन साहित्यकार बने।इनकी प्रकाशित रचनाओं की संख्या 186 है,...
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    14,39 €

  • Bagula Ke Pankh
    Chatursen Acharya
    वैशाली की नगरवधू, वयं रक्षामः, सोमनाथ जैसे कालजयी उपन्यास लिखनेवाले हिन्दी के बेहद लोकप्रिय लेखक आचार्य चतुरसेन का यह उपन्यास राजनीति की पृष्ठभूमि पर लिखा गया है। राजनीति में लोकप्रियता का लाभ उठाकर शीर्ष पर पहुँचना कोई नयी बात नहीं है। कितनी बार देखा गया है अपने निजी स्वार्थों के लिए आम जनता को प्रभावित कर अयोग्य लोग सत्ता में अपनी जगह बना लेते हैं और ज़मीनी संघर्ष से उभरने वाल...
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    15,46 €

  • Vayam Rakshamah
    Acharya Chatursen
    हमारे हिंदी साहित्य का जो रूप आज हमें दिखता है, जिन तमाम विविधताओं से हमारा साबका होता है, उसके निर्माण में अर्पित कई बड़े साहित्यकारों का योगदान निश्चित तौर पर भुलाया नहीं जा सकता। आचार्य चतुरसेन शास्त्री उन्हीं महान साहित्यकारों में से एक हैं। पंडित जी का गद्य भारतीय संस्कृति के लिए एक उपलब्धि है। हमारे अतीत की एक गंभीर तस्वीर उनके रचना संसार में मौजूद है। उनका दृष्टिकोण हमेशा...
    Disponible

    39,72 €


01 02