LIBROS DEL AUTOR: acharya chatursen

42 resultados para LIBROS DEL AUTOR: acharya chatursen

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  • Ambapalika and Other Stories
    Acharya Chatursen Shastri / Gurudev Meher
    Acharya Chatursen’s Ambapalika and Other Stories brings together twenty-eight of the finest short stories by one of Hindi literature’s most versatile and celebrated masters. Acharya Chatursen Shastri (1891-1960) was a novelist, essayist, historian, and physician whose works combined scholarly depth with literary imagination. In this collection, his narratives span the sweep of ...
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    21,98 €

  • DEVANGANA (The God’s Maiden)
    Acharya Chatursen Shastri / Gurudev Meher
    In 12th-century Vikramashila, merchant Dhananjaya Seth offers his beloved son Divodas to the Buddhist order. Renamed Dharmanuj, the young monk’s piety soon clashes with the sinister tantric practices of Acharya Vajrasiddhi, who schemes to seize wealth and power. Cast into a subterranean prison, Dharmanuj is aided by his loyal steward, Sukhdas, disguised as a monk, and drawn to ...
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    19,05 €

  • Vayam Rakshamah
    Acharya Chatursen
    NA ...
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    34,89 €

  • Sona aur Khoon (Bhaag -2)
    Acharya Chatursen
    NA ...
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    23,18 €

  • Sona aur Khoon (Bhaag -1)
    Acharya Chatursen
    NA ...
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    23,21 €

  • Vaishali Ki Nagarvadhu
    Acharya Chatursen
    NA ...
    Disponible

    33,75 €

  • Sona aur Khoon (Bhaag -3)
    Acharya Chatursen
    NA ...
    Disponible

    24,27 €

  • Goli
    Acharya Chatursen
    NA ...
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    22,13 €

  • Sona aur Khoon (Bhaag -4)
    Acharya Chatursen
    NA ...
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    26,33 €

  • Somnath
    Acharya Chatursen
    NA ...
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    31,70 €

  • Sona aur Khoon (Bhaag -3)
    Acharya Chatursen
    शहादरे में भगियों के चौधरी छुट्टन की बेटी का ब्याह था और उसी दिन उसके यहाँ बारात आपी थी, जिस दिन चौधरी रूपराम का काफिला शहादरा आकर पहुँचा, संयोग ऐसा हुआ कि छुट्टन मेहतर के यहाँ बारात तो आ पहुँची थी पर भात नहीं आया था। भात आने वाला था हापुड़ ही से। आम दस्तूर था कि जब तक भात न आ जाता था, लड़की का ब्याह नहीं हो सकता था। भात लाने का हक लड़‌की लड़के के मामा का होता है। भात लाने वाला...
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    22,84 €

  • Sona aur Khoon (Bhaag -1)
    Acharya Chatursen
    ईस्ट इण्डिया कम्पनी इंग्लैंड की पार्लियामेंट के कानून द्वारा कायम हुई थी। कम्पनी के अधिकारों को कायम रखने के लिए पार्लियामेंट हर बीस बरस बाद नया कानून पास करती थी, जिसे चार्टर एक्ट कहते थे। सन् 1813 में जो चार्टर एक्ट बनाया गया उसमें इंग्लैंड का बना माल भारत के सिर मढ़ने और भारत के प्राचीन उद्योग-धंधों का नाश करने का विधिवत् प्रयत्न किया गया। वही एक्ट भारत की भारी भयंकर दरिद्रत...
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    19,71 €

  • Sona aur Khoon (Bhaag -2)
    Acharya Chatursen
    वही सख्त सर्दी थी। पेरिस गहरे कुहरे में डूबा हुआ था। मार्च का महीना था। उन दिनों पेरिस में सन्नाटा छाया हुआ था। यद्यपि अब दस बज चुके थे, पर सड़कों पर इक्को-दुक्के ही आदमी नजर पड़ते थे। गली-कूचे सुनसान थे। लोगों के मुँहपर हवाइयों उड़ रही थी। लुई की हत्या के बाद यूरोप-भर फ्रांस का दुश्मन हो गया था और यूरोप की शक्तियों ने उसे चारों ओर से घेर रखा था। इग्लैंड ने तो उसके कई इलाके दबो...
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    22,88 €

  • Dharamputra
    Acharya Chatursen
    ''यदि मैं भारत, ब्रिटेन, अमेरिका तथा धुरी राष्ट्रों समेत शेष संसार को अहिंसा की ओर ले जा सकता, तो मैं ऐसा कर डालता; पर यह चमत्कार तो केवल परमात्मा के हाथ में है। अब मेरे हाथ तो केवल यही है, कि करूँ या मरूं। आपको पत्नी-परिजनों का मोह त्याग देना होगा। संसार में सब कुछ छोड़ देना होगा। मैं चाहता हूँ, कि अब विरोधी अंग मिलकर भारत को विदेशी शासन से मुक्त कर लें, चाहे इसके लिए उन्हें क...
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  • Somnath
    Acharya Chatursen
    डॉ. श्यामसुंदर दास जन्म : 1875 ई. में काशी में। शिक्षा : 1897 ई. में बी.ए. (स्नातक) पास किया। सन् 1921 ई. में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग के अध्यक्ष पद पर नियुक्त किये गये । नागरी प्रचारिणी सभा की स्थापना आपने अपने विद्यार्थी जीवन से ही अपने सहयोगियों की सहायता से की थी। हिन्दी साहित्य सम्मेलन ने आपको ’साहित्य वाचस्पति’ और काशी विश्वविद्यालय ने ’डी.लिट्.’ की उपाध...
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  • Vayam Rakshamah Parishisht evam chitra sahit
    Acharya Chatursen
    अब लक्ष्मण ने सात बाण धनुष पर चढ़ाकर रावण की ध्वजा काट डाली। इसी समय रावण की दृष्टि विभीषण पर पड़ी। उसने तत्काल बिजली की भांति दीप्तिमती महाशक्ति उसपर फेंकी। परन्तु लक्ष्मण ने उसे बीच में ही तीन बाणों से काट डाला। इस प्रकार लक्ष्मण के हाथों विभीषण की रक्षा होते देख रावण क्रोध से सर्प की भांति फुफकारने लगा। उसने कहा- ’अरे सौमित्रि, तेरे हस्तलाघव की प्रशंसा करता हूं। तुझमें शक्तिधर...
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    32,53 €

  • Dharmputra
    Acharya Chatursen
    धर्मपुत्र (ईश्वर पुत्र) एक प्रतिष्ठित हिंदू डॉक्टर के सबसे बड़े बेटे दिलीप की कहानी है। वह एक कट्टर हिंदू है जो भारत में हिंदू गौरव के पुनरुत्थान में उतना ही दृढ़ता से विश्वास करता है जितना कि ब्रिटिश शासन से देश की स्वतंत्रता में। वे राष्ट्रीय संघ में राजनीतिक रूप से सक्रिय रहते हुए धार्मिक जीवन जीते हैं। वह एक धर्मनिष्ठ हिंदू लड़की से शादी करना भी पसंद करते हैं जो सीता और सा...
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    16,74 €

  • Aag aur Dhuaan
    Acharya Chatursen
    26 अगस्त, 1891 को बुलंदशहर के चंदोक में जन्मे आचार्य चतुरसेन शास्त्री ने 32 उपन्यास, 450 कहानियाँ और अनेक नाटकों का सृजन कर हिन्दी साहित्य को समृद्ध किया । ऐतिहासिक उपन्यासों के माध्यम से उन्होंने कई अविस्मरणीय चरित्र हिन्दी साहित्य को प्रदान किए। अपनी समर्थ भाषा शैली के चलते शास्त्रीजी ने अद्भुत लोकप्रियता हासिल की और वह जन साहित्यकार बने।इनकी प्रकाशित रचनाओं की संख्या 186 है,...
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    14,39 €

  • Bagula Ke Pankh
    Chatursen Acharya
    वैशाली की नगरवधू, वयं रक्षामः, सोमनाथ जैसे कालजयी उपन्यास लिखनेवाले हिन्दी के बेहद लोकप्रिय लेखक आचार्य चतुरसेन का यह उपन्यास राजनीति की पृष्ठभूमि पर लिखा गया है। राजनीति में लोकप्रियता का लाभ उठाकर शीर्ष पर पहुँचना कोई नयी बात नहीं है। कितनी बार देखा गया है अपने निजी स्वार्थों के लिए आम जनता को प्रभावित कर अयोग्य लोग सत्ता में अपनी जगह बना लेते हैं और ज़मीनी संघर्ष से उभरने वाल...
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    15,46 €

  • Vayam Rakshamah
    Acharya Chatursen
    हमारे हिंदी साहित्य का जो रूप आज हमें दिखता है, जिन तमाम विविधताओं से हमारा साबका होता है, उसके निर्माण में अर्पित कई बड़े साहित्यकारों का योगदान निश्चित तौर पर भुलाया नहीं जा सकता। आचार्य चतुरसेन शास्त्री उन्हीं महान साहित्यकारों में से एक हैं। पंडित जी का गद्य भारतीय संस्कृति के लिए एक उपलब्धि है। हमारे अतीत की एक गंभीर तस्वीर उनके रचना संसार में मौजूद है। उनका दृष्टिकोण हमेशा...
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    39,72 €

  • Vayam Rakshamah
    Acharya Chatursen
    इस उपन्यास का मुख्य पात्र रावण है, न कि राम। इसमें रावण के चरित्र के अन्य पक्ष को रेखांकित करते हुए उसको राम से श्रेष्ठ बताया गया है। ’वयं रक्षामः’ एक उपन्यास तो अवश्य है; परंतु वास्तव में वह वेद, पुराण, दर्शन और वैदेशिक इतिहास-ग्रंथों का दुस्सह अध्ययन है। हिंदुस्तान की आर्य संस्कृति पर इस पुस्तक में कुछ इस तरह आचार्य चतुरसेन प्रकाश डालते हैं- ’उन दिनों तक भारत के उत्तराखण्ड म...
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    29,12 €

  • Goli
    Acharya Chatursen
    लेखक के सर्वाधिक प्रसद्धि स्तंभ आचार्य चतुरसेन ने इस उपन्यास में राजस्थान के रजवाड़ों और उनके रंगमहलों की भीतरी ज़िन्दगी का बड़ा मार्मिक, रोचक और मनोरंजक चित्रण किया है। उसी परिवेश की एक बदनसीब गोली की करुण-कथा, जो जीवन-भर राजा की वासना का शिकार बनती रही और उसका पति उसे छूने का साहस भी नहीं कर सका।''देखिये, मैं अपनी समूची कहानी आपको बताने पर आमादा हूं. निःसन्देह आपको वह अद्भुत ...
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    17,52 €

  • Vaishali Ki Nagarvadhu
    Acharya Chatursen
    वैशाली की नगरवधू, आचार्य चतुरसेन शास्त्री द्वारा रचित एक हिन्दी उपन्यास है जिसकी गणना हिन्दी के सर्वश्रेष्ठ उपन्यासों में की जाती है। यह उपन्यास दो भागों में हैं, जिसके प्रथम संस्करण दिल्ली से क्रमशः 1948 तथा 1949 ई. में प्रकाशित हुए। इस उपन्यास के सम्बन्ध में इसके आचार्य चतुरसेन जी ने कहा था, ’मैं अब तक की सारी रचनाओं को रद्द करता हूँ और ’वैशाली की नगरवधू’ को अपनी एकमात्र रचना...
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    29,14 €

  • Devangana
    Acharya Chatursen
    भारतीय जीवन को बौद्धधर्म ने एक नया प्राण दिया। बौद्ध-संस्कृति भारतीय संस्कृति का एक अभंग और महत्त्वपूर्ण अंग थी। उसने भारतीय-संस्कृति के प्रत्येक अंग को समृद्ध किया। न्याय-दर्शन और व्याकरण में जैसे चोटी के हिन्दू विद्वान् अक्षपाद, वात्स्यायन, वाचस्पति, उदयनाचार्य थे उससे कहीं बढ़े-चढ़े बौद्ध दार्शनिक नागार्जुन, वसुबन्धु, दिङ्नाग, धर्मकीर्ति, प्रज्ञाकर गुप्त और ज्ञानश्री थे। पाण...
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    13,37 €

  • Bride of the City Volume 1
    Acharya Chatursen / A.K. Kulshreshth / Pratibha Vinod Kumar
    In the ancient republic of Vaishali, a childless couple discover an abandoned infant girl in a mango orchard. They name her Ambapali, one who sprouted from a mango. When she turns eighteen, Ambapali is forced to become a courtesan - the Bride of the City - under Vaishali’s laws which dictate that a woman as beautiful as her cannot be only one man’s wife. Ambapali bows before th...
    Disponible

    18,01 €

  • Bride of the City Volume 2
    Acharya Chatursen / A.K. Kulshreshth / Pratibha Vinod Kumar
    In the ancient republic of Vaishali, a childless couple discover an abandoned infant girl in a mango orchard. They name her Ambapali, one who sprouted from a mango. When she turns eighteen, Ambapali is forced to become a courtesan - the Bride of the City - under Vaishali’s laws which dictate that a woman as beautiful as her cannot be only one man’s wife. Ambapali bows before ...
    Disponible

    18,53 €

  • Poornahuti (पूर्णाहुति)
    Acharya Chatursen
    ...
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    17,91 €

  • Patthar Yug Ke Do Boot (पत्थर युग के दो बुत)
    Acharya Chatursen
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    16,82 €

  • Hridaya Ki Pyas (हृदय की प्यास)
    Acharya Chatursen
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    16,64 €

  • Dukhva main kaase kahun
    Acharya Chatursen
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    Disponible

    21,67 €


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